ड्रेगन की तकरार.... जनता के तेवर...
तनातनी के माहौल को कम करने के लिए... सैन्य अधिकारियों के स्तर की बातचीत शुरू हुई.....। वार्ता किसी मुकाम को हासिल कर पाती... इससे पहले ही अपनी बौनी हरकत को.... अपने बौनेपन जैसा अंजाम दे दिया...। भारत की सेना के एक अधिकारी सहित बीस सैनिक शहीद हो गए... कुछ लापता भी बताए जाते हैं.....नुकसान चीनी सेना ने भी उठाया...। लेकिन कितना इसका अधिकारिक आंकड़ा आना है...। भारत की तरफ से चालीस से ज्यादा चीनी सैनिकों के हताहत होने की खबर है.....। चीन इसको लेकर चुप है...।
चीनी हरकत से... भारतीय नागरिकों में उबाल आना स्वाभाविक है... अपने अपने स्तर से सभी चीन को मजा चखाने के अरमान रखते हैं... रखना भी चाहिए...। ऐसे में मीडिया की मुख्य धारा के कुछ टीवी चैनल....सेना की पेट्रोलिंग पर सवाल उठाकर.....सेना का मनोबल तोड़ने की नापाक कोशिश कर रहे हैं.... जनता को इन्हें भी सबक सिखाना होगा......। इन्ही स्थितियों के चलते.....चीन के सामान का बहिष्कार शुरू होना... भारतीय होने के गौरव की निशानी कहा जाए... तो कोई अतिश्योक्ति नहीं....। इसी भावना के चलते... कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ....चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने की तैयारी कर ली है...। कैट ने उन तीन हजार वस्तुओं की सूची तैयार की है.... जिनका आयात चीन से होता है.... और उत्पादन भारत में भी होता है.... सस्ती के चक्कर में भारतीय उत्पादन को.... नहीं खरीदा जाता..। यह कदम... अमलीजामा पहन ले... तो चीन के खिलाफ उबल रहा.... गुस्सा सही साबित हो सके....।
जनता जनार्दन तो तैयार है... लेकिन सरकार की मंशा जन के मन के साथ.... नजर नही आती....। वजह है दिल्ली मेरठ हाई वे.... की दिल्ली के अशोक नगर से.... साहिबाबाद तक की.... 5.6 किलोमीटर की सुरंग बनाने का टेंडर..... तनाव के चलते हुए... चीन की कंपनी को..... 1126 करोड़ में दिया जाना...। बात यहाँ नही रुकती.... महाराष्ट्र में... एक अमरीकी मोटर कंपनी... का चीन की कंपनी द्वारा.. वहाँ की सरकार की मध्यस्थता से.... खरीदा जाना.....।
वहीं देश के कुल आयात के.... लगभग चालीस प्रतिशत हिस्से पर... चीन का कब्जा होना....। देश के स्टार्ट अप में.... चीन का भारी भरकम निवेश होना...। ...लगे हाथ झारखंड के उस साहेबगंज का जिक्र....जहाँ का वीर सपूत गुलबान घाटी से...शहीद होकर पार्थिव देह के रूप में लौटा है.....वहाँ की कोयला खानों की नीलामी शुरू हो रही है...उसकी शहादत के मौके पर....इन खानों पर चीनी कंपनियां....काबिज होकर... भारतियों की राष्ट्रीयता को....मुँह चिढ़ाती नजर न आयें.....। ये स्थितियां बताती हैं... हमें अपनी अर्थ और व्यापार नीति पर पुनः विचार करना होगा....। यही नही .. सामरिक नीति भी ध्यान खींचती है... सेना के ही पूर्व अधिकारियों की प्रकाशित... चेतावनी के बाद भी... सरकार का सतर्क न होना... ठीक तो नहीं कहा जा सकता...। उन सेना अधिकारियों की चेतावनी के... कुछ अंश... हम स्क्रीन शॉट के रूप में... साझा भी कर रहे हैं.. आप अंदाज लगा सकते हैं....।
पिछले छः सालों में... डेढ़ दर्जन मुलाकात हमारे पीएम... और चीनी राष्ट्रपति की हुई.... जिनमें पांच बार पीएम का बीजिंग जाना... शी जिन पिंग का भारत आना... या अन्य मंचों पर इन दोनों नेताओं की... मुलाकातें शामिल हैं.... फिर ऐसा क्या हुआ कि... चीन उस गुलवान घाटी पर... अपना आधिपत्य जता रहा है... जिस पर 1962 के बाद से... उसने कोई चर्चा ही नहीं की....। आधी सदी बीत जाने के बाद.. ये चीनी दावा ... कहीं हमारी विदेश नीति को सवालों के कटघरे में... तो खडा नहीं कर रहा...। .... जो देश वैश्विक मंच पर... हमारा समर्थन करते थे... जिनमें नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका, मालदीव, आदि अन्य हमारे... पड़ोसी देश शामिल है....। वो आज चीन के पक्ष में क्यों खड़े हैं... क्या यह भारत की कूटनीतिक विफलता का परिणाम है...?
फिर भी पीएम मोदी का बयान.... भारतीय सेना के वीरों का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा.. यकीन तो दिलाता है.... लेकिन आशंकाओं के साथ....। 19 जून को सर्वदलीय बैठक भी है.. चीन के साथ तनाव को लेकर.... संकट का समय है.... सभी एक होकर ड्रेगन की चालबाजियों को विफल करने... कमर कसेंगे....। जनता भी जोश में है.... होश के साथ चीन को मुँह तोड़ जवाब दें.....। कहा भी जा रहा है जोश में.... 1962 वाला भारत नहीं है...... होश यह भी रखना होगा.... चीन भी 2020 में..... अमरीका को आँखें दिखाने से बाज नहीं आ रहा है......।
संपादकीय
ड्रेगन ने अपनी चिर परिचित शैली को.... एक बार फिर से अपनाते हुए...... व्यापारिक मित्रता की प्रगाढ़ता... होते हुए भी भारतीय सीमा में घुसपैठ कर ली.... बिल्कुल वैसी हिमाकत दिखाई....जैसी डोकलाम में दर्शाई थी.....सूत्रों की मानें तो... लगभग साठ किलोमीटर अंदर तक..... गलवान घाटी के....हिमालयी सामरिक महत्व की चोटियों के सत्तर प्रतिशत हिस्से पर.... अधिकार भी कर लिया...। .... और तो और सामरिक सामान की आसान आवाजाही करने के लिए.... इन बीस हजार फुट ऊँची... बर्फ़ीली चोटियों पर निर्माण भी कर लिया...। भारतीय सेना.... चीनी सेना की तुलना में... ठीक वैसी स्थिति में है... जैसी कारगिल युद्ध के दौरान रही.....। यानि लाल आँखे ऊँचाई पर... और हमारे लड़ाके निचाई पर...।तनातनी के माहौल को कम करने के लिए... सैन्य अधिकारियों के स्तर की बातचीत शुरू हुई.....। वार्ता किसी मुकाम को हासिल कर पाती... इससे पहले ही अपनी बौनी हरकत को.... अपने बौनेपन जैसा अंजाम दे दिया...। भारत की सेना के एक अधिकारी सहित बीस सैनिक शहीद हो गए... कुछ लापता भी बताए जाते हैं.....नुकसान चीनी सेना ने भी उठाया...। लेकिन कितना इसका अधिकारिक आंकड़ा आना है...। भारत की तरफ से चालीस से ज्यादा चीनी सैनिकों के हताहत होने की खबर है.....। चीन इसको लेकर चुप है...।
चीनी हरकत से... भारतीय नागरिकों में उबाल आना स्वाभाविक है... अपने अपने स्तर से सभी चीन को मजा चखाने के अरमान रखते हैं... रखना भी चाहिए...। ऐसे में मीडिया की मुख्य धारा के कुछ टीवी चैनल....सेना की पेट्रोलिंग पर सवाल उठाकर.....सेना का मनोबल तोड़ने की नापाक कोशिश कर रहे हैं.... जनता को इन्हें भी सबक सिखाना होगा......। इन्ही स्थितियों के चलते.....चीन के सामान का बहिष्कार शुरू होना... भारतीय होने के गौरव की निशानी कहा जाए... तो कोई अतिश्योक्ति नहीं....। इसी भावना के चलते... कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ....चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने की तैयारी कर ली है...। कैट ने उन तीन हजार वस्तुओं की सूची तैयार की है.... जिनका आयात चीन से होता है.... और उत्पादन भारत में भी होता है.... सस्ती के चक्कर में भारतीय उत्पादन को.... नहीं खरीदा जाता..। यह कदम... अमलीजामा पहन ले... तो चीन के खिलाफ उबल रहा.... गुस्सा सही साबित हो सके....।
जनता जनार्दन तो तैयार है... लेकिन सरकार की मंशा जन के मन के साथ.... नजर नही आती....। वजह है दिल्ली मेरठ हाई वे.... की दिल्ली के अशोक नगर से.... साहिबाबाद तक की.... 5.6 किलोमीटर की सुरंग बनाने का टेंडर..... तनाव के चलते हुए... चीन की कंपनी को..... 1126 करोड़ में दिया जाना...। बात यहाँ नही रुकती.... महाराष्ट्र में... एक अमरीकी मोटर कंपनी... का चीन की कंपनी द्वारा.. वहाँ की सरकार की मध्यस्थता से.... खरीदा जाना.....।
वहीं देश के कुल आयात के.... लगभग चालीस प्रतिशत हिस्से पर... चीन का कब्जा होना....। देश के स्टार्ट अप में.... चीन का भारी भरकम निवेश होना...। ...लगे हाथ झारखंड के उस साहेबगंज का जिक्र....जहाँ का वीर सपूत गुलबान घाटी से...शहीद होकर पार्थिव देह के रूप में लौटा है.....वहाँ की कोयला खानों की नीलामी शुरू हो रही है...उसकी शहादत के मौके पर....इन खानों पर चीनी कंपनियां....काबिज होकर... भारतियों की राष्ट्रीयता को....मुँह चिढ़ाती नजर न आयें.....। ये स्थितियां बताती हैं... हमें अपनी अर्थ और व्यापार नीति पर पुनः विचार करना होगा....। यही नही .. सामरिक नीति भी ध्यान खींचती है... सेना के ही पूर्व अधिकारियों की प्रकाशित... चेतावनी के बाद भी... सरकार का सतर्क न होना... ठीक तो नहीं कहा जा सकता...। उन सेना अधिकारियों की चेतावनी के... कुछ अंश... हम स्क्रीन शॉट के रूप में... साझा भी कर रहे हैं.. आप अंदाज लगा सकते हैं....।
पिछले छः सालों में... डेढ़ दर्जन मुलाकात हमारे पीएम... और चीनी राष्ट्रपति की हुई.... जिनमें पांच बार पीएम का बीजिंग जाना... शी जिन पिंग का भारत आना... या अन्य मंचों पर इन दोनों नेताओं की... मुलाकातें शामिल हैं.... फिर ऐसा क्या हुआ कि... चीन उस गुलवान घाटी पर... अपना आधिपत्य जता रहा है... जिस पर 1962 के बाद से... उसने कोई चर्चा ही नहीं की....। आधी सदी बीत जाने के बाद.. ये चीनी दावा ... कहीं हमारी विदेश नीति को सवालों के कटघरे में... तो खडा नहीं कर रहा...। .... जो देश वैश्विक मंच पर... हमारा समर्थन करते थे... जिनमें नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका, मालदीव, आदि अन्य हमारे... पड़ोसी देश शामिल है....। वो आज चीन के पक्ष में क्यों खड़े हैं... क्या यह भारत की कूटनीतिक विफलता का परिणाम है...?
फिर भी पीएम मोदी का बयान.... भारतीय सेना के वीरों का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा.. यकीन तो दिलाता है.... लेकिन आशंकाओं के साथ....। 19 जून को सर्वदलीय बैठक भी है.. चीन के साथ तनाव को लेकर.... संकट का समय है.... सभी एक होकर ड्रेगन की चालबाजियों को विफल करने... कमर कसेंगे....। जनता भी जोश में है.... होश के साथ चीन को मुँह तोड़ जवाब दें.....। कहा भी जा रहा है जोश में.... 1962 वाला भारत नहीं है...... होश यह भी रखना होगा.... चीन भी 2020 में..... अमरीका को आँखें दिखाने से बाज नहीं आ रहा है......।





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