लेखक 


 एक किन्नर का दर्द

न  नर  हूँ  ,न  नारी , बताई गई।
अलग  अंग   सबसे  बनाई गई।

समझ से परे है , न  आये समझ-
कि क्यों इस जहां में,मैं लाई गई।

पराया किया जन्म  दे  कर  मुझे-
नहीं कुल कि दीपक  बताई  गई।

भरूँ  पेट  कैसे    बताओ   जरा-
मैं तो  हर  जगह  से  भगाई गई।

कहे कोई हिजड़ा,तो छक्का मुझे-
अलग   मेरी   दुनिया  बसाई गई।

नहीं  कोई  ग़लती  है मेरी  मगर-
दो  पैसों  कि ख़ातिर  नचाई गई।

मिले  ग़र  ख़ुदा तो  पुछूँगी  यही-
कि  क्यूँ   मैं  अधूरी  बनाई  गई ....?

शैलेश प्रजापति "शैल", मुंगेर, बिहार

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 शिक्षा


शिक्षा  को  शिक्षा , अब मानता कौन है ?
ज्ञान   सच्चा    यहाँ  ,  बाँटता   कौन है ?

पास  सब होंगे , कर के यहाँ पर नकल-
फिर किताबों को अब , चाटता कौन है ?

उड़  रही धज्जियां , शिक्षा के नाम की-
हो   रही    धाँधली  ,  रोकता   कौन है ?

नित  बदलती  रही   है  , किताबें  यहाँ-
क्या लिखा क्या पढ़ा , जानता कौन है ?

खूब  मूल्य  बढ़ा  दो , किताबों कि तुम-
निर्धनों   की   कमर ,  तोड़ता  कौन है ?

बात  निकलेगी  तो ,  दूर  तक जाएगी-
शिक्षा  के  नाम  पर ,  लूटता   कौन है ?

प्लेट  के  मोह  ने , रोक  रक्खा है बस -
स्कूल  को स्कूल , अब बोलता कौन है ?

शैलेश प्रजापति "शैल" मुंगेर, बिहार

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परिचय

शैलेश प्रजापति शैल, ग्राम - छोटी केशोपुर, 
पोस्ट - जमालपुर, जिला - मुंगेर, बिहार के रहने वाले हैं। हिंदी ग़ज़ल,मुक्तक, कविता, कहानी, छंद आदि के सृजन की साहित्यिक रुचि है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है। आप को विभिन्न साहित्यिक मंचों से साहित्य सेवा के लिए सम्मानित किया जा चुका है। आप ज्योतिर्गमय अंजुमन नामक साहित्य संस्था का संचालन भी करते हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है। 
संपादक
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