आज के राजनीतिक माहौल से निराश , 15 अगस्त की शुभकामनाएं !
डॉ नरेन्द्र सिंह
सरफ़रोशी की तमन्ना तो पहले होती थी , कुर्सी'ओ'सत्ता की तमन्ना , अब सभी के दिल में है ! देश पर मर मिटने की तमन्ना तो पहले होती थी , कैसे लूटे देश और भर लें तिजोरी , बस ये ही तमन्ना , अब हमारे दिल में है । जो पुराने सरफ़रोश थे , आज़ाद , बिस्मिल , भगतसिंह , सुभाष , और सैकड़ों गुमनाम से , वो आज हाशिये पर हैं ! साल में बस दो दिनों के लिए हीरो हैं , बाकी समय बस , भाषणों के काफ़िये पर हैं ! इसलिए अब नौजवानों में , तमन्नाये सरफ़रोशी नहीं होती , कुर्सी ओ सत्ता की तमन्ना , अब उनके भी दिल में है किसको जोड़ें , किसको तोड़ें किसके तलवे चाट लें , उसूलों ईमान की बातों में अब कोई दम नहीं , सभी के दिल में है । लोकशाही में जहाँ , " भूख " अब भी सबसे अहम है , ईमानदारी को कोई कैसे चुनेगा ? जब बिक रहे हों , शेर , चीते , बाघ भी , तो भेड़ , बकरी , मेमनों की कोई क्यों सुनेगा ? तुम जिंदा हो , जिंदा रहो ये उनकी मेहरबानी है , बात सरफ़रोशी की करोगे तो ये तुम्हारी , अंतिम निशानी है ! सरफ़रोशी की तमन्ना तो पहले होती थी , चलती रहे बस सांस , रह सकें जिंदा , बस ये ही तमन्ना अब हमारी जनता के दिल में है।डॉ नरेन्द्र सिंह , भोपाल
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परिचय
लेखक, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल मे जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। एक निजि चिकित्सालय मे सेवा देते हुए आप समाज मे लेखनी के माध्यम से भी अलख जगाने का अतुलनीय उदाहरण हैं।
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संपादक


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