लेखिका 

मिट्टी की नारी हुं 
तो क्या हुआ
श्रृष्टि का अस्तित्व 
मेरे बिना कुछ नहीं ,
मुझ मिट्टी में ही तो
होता अंकुरित नव जीवन,
हां मैं मिट्टी हुं धरा हुं मैं ,
क्युं सोचते हो की तुम 
आकाश हो ?
आकाश के आंसु
पीने की क्षमता 
केवल धरती में ही है 
मुझे मिट्टी कहने वाले
कभी बच नहीं पाएंगे
एक दिन मेरी तरह 
मिट्टी बन कर मुझमें 
ही सम्माहित हो जाऐंगे
तब क्या रह जाऐगा?
मिट्टी मिट्टी और केवल मिट्टी,
मुझे आधारहीन ना समझो
मैं हुं तुम्हारी निर्माता
नव अंकुरण की क्षमता 
रखती हुं मैं ,
मिट्टी ही सही तो
क्या हुआ ,
पर अपनी पहचान
चिरस्थायी है 
गर्व से कहती हुं  की 
हाँ मिट्टी की नारी हुं मैं.....!!

सुषमा शर्मा "पहाङी कोयल''जालंधर, पंजाब

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परिचय

सुषमा शर्मा " पहाङी कोयल" जालन्धर सिटी,  पंजाब , में निवास करती हैं। साहित्य में रुचि होने से लेखन की प्रेरणा मिली। आप की रचनाएँ विभिन्न मंचों से प्रकाशित और प्रसारित होती रहती हैं। इसके अलावा आप की रुचि संगीत में भी है और भजन गायिका के रूप में आप एक स्थापित नाम है। एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है। 
संपादक
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