लूट सके तो लूट..... 

कोरोना.... एक महामारी... जो शरीर में कम... दिमाग में ज्यादा घुसी है..... शायद उससे भी ज्यादा... अर्थ व्यवस्था की तबाही के लिए जिम्मेदार है...। अगर इस चायनीज बीमारी के देशज आंकड़ों पर गौर करें..... तो इक्कीस लाख लोगों को संक्रमित दर्शाता यह आंकडा.... निश्चित ही डरा देने वाला है.... राहत की बात है कि... इस बीमारी की बिना दवा की जानकारी के.... और किसी वेक्सीन के अस्तित्व में नहीं होने के बाद भी... हमारे देश के... क्लोज केसेस के 97 फीसदी मरीज... कोरोना से जंग जीतकर घर लौट रहे हैं..... उन मरीजों का रेड कॉरपेट वेलकम.... उनके परिजन और मोहल्ले वाले मिल कर... कहीं कहीं ढोल नगाड़े बजाते हुए... आरती उतार कर... माला पहना कर किए जा रहे हैं...। 
कुछ समय पहले एक अखबार में खबर आई.... सेम्पल लिए बिना ही... रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई... ।  विचार आया क्या ये संभव है....? उहापोह खत्म होती इससे पहले ही.... अखबार की खबर पर मोहर लगाती एक खबर हमारे पास भी आ गई.....। मजेदार बात यह है कि.... जिस शारीरिक स्थिति में... व्यक्ति को बतोर कोरोना मरीज.... कोविड 19 सेंटर में भर्ती किया गया... दसवें दिन जब मरीज को वहाँ से डिस्चार्ज किया गया... तब भी मरीज उन्हीं शारीरिक परिस्थितियों में था....। ये सब हम नहीं कह रहे हैं.... ये बोल रहा है वह डिस्चार्ज पेपर.... जो मरीज को सौंपा गया.....। 
आपको शायद यकीन न आए.... लगे हाथ उसमे जो कुछ लिखा गया है... वो भी जान लेते हैं....। 

जी सी भर्ती के समय गुड डिस्चार्ज के वक्त भी गुड लिखा गया है....। 
ब्लड प्रेशर क्रमशः 122/80 और 120/70
पल्स रेट क्रमशः 79 और 90 पर मिनट
टेंप्रेचर क्रमशः 96.4 और 97f 
ओक्सिजन सिचुरेशन क्रमशः 98 और 98 ℅

उक्त टेबल यह बताने के लिए काफी है कि... किस तरह के लोगों को कोरोना मरीज... बताया जाकर... उन्हें और उनके परिजनों को मानसिक प्रताड़ना देने जैसा काम किया जा रहा है.....। इसी मरीज ने बताया कि इलाज के नाम पर शुरुआत में गोली का एक पत्ता दिया जाता है.... जिसे खाते रहो....। इसको डिस्चार्ज करते वक्त जो... मल्टी विटामिन और विटामिन सी टेबलेट खाने की सलाह... आगामी दस दिनों के लिए दी गई है... वह भी उसको खरीद कर खाना है.....। 
एक और किस्सा समझ लें फिर आगे बढ़ते हैं... वह है एक दो साल के घर में ही रहने वाले बच्चे को.... कोरोना पेशेंट घोषित कर देना... जबकि उसकी माँ सहित परिवार के अन्य सदस्य.... की रिपोर्ट नेगेटिव है... अंदाज लगाएं.. यह संक्रमण की बीमारी उसके बाहर निकले वगैर... बाहर आने जाने सदस्य को हुए बिना... उस बच्चे तक कैसे पहुंची होगी...। मध्यप्रदेश के जिला मुख्यालय सीहोर के भोपाल नाका स्थित कोविड- 19 सेंटर के.. अन्य मरीजों से संपर्क किए जाने पर... उन्होंने भी यही राम कहानी सुनाई.... हमको कोई तकलीफ नहीं है.... जबरन  पकड़ कर यहाँ भर्ती कर दिया गया है.....। ऐसे ही करीब आधा दर्जन मामले सीहोर जिले के इछावर के हैं जहां कोरोना ने नाम परिवार को सरकारी रवैये के कारण रोना पड़ा।
 इन गजब के किस्सों को जानने के बाद.... सवाल दिमाग में आना लाजिमी है कि... ऐसा किए जाने के पीछे की वजह क्या है....? कुछ और खोजबीन किए.... जाने पर मालूम होता है कि... एक मरीज को ठीक किए जाने की एवज में... डेढ़ लाख रुपया की राशि मिलती है....। यह आंकडा कितना सही है.... या कितना गलत... इस बारे में बात करने को जिम्मेदार तैयार ही नहीं है...। वैसे राशि का आवंटन किया जाना तो तय है...। खैर मुद्दे की बात यह है कि... गंभीर प्रकृति के मरीजों के लिए... जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के आठ पलंग वाले... वार्ड को अभी आईसोलेशन वार्ड बना दिया गया है.... जहाँ के मरीज को सुबह और शाम दवाएं दी जा रही हैं... । 
अब अगर उपरोक्त तथ्यों के आधार पर इस बीमारी को.... बच्चे को डराये जाने वाले "हौआ" से तुलना की जाए तो बेमानी नहीं होगा....। कम से कम उन अधिकांश लोगो के लिए तो ये हौआ ही है.... जिन्हें बेवजह कोविड सेंटर के हवाले किया जा रहा है...। इस तरह की गतिविधि... देश प्रदेश के बाकी... हिस्सों में चलने पर अचरज नहीं होना चाहिए.....। इसके लिए पहले निजी क्षेत्र के अस्पताल ही बदनाम थे.... अब शायद कोरोना ने अपने पैर और पसार लिए हैं.... कोरोना नाम की लूट मची है.... लूट सके तो लूट....। अंत काल पछताएगा जब "कोरोना काल" जाएगा छूट....

शैलेश तिवारी, सीहोर (मध्यप्रदेश)

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