बेपनाह अतिक्रमण की चपेट मे जलाशय,

आज जल है तो आगे मई-जून वाला कल है . .

इछावर 02 नवंबर, 2019                             एमपी मीडिया पाइंट

ऐसा मौका अर्से बाद आया है जब इछावर ब्लाक के सभी तालाब इस समय लबालब भरे हैं। नवम्बर शुरु हो गया है इस माह के पहले सप्ताह से तालाबों से अवैध पलेवा,अवैध सिंचाई भी शुरु हो जाएगी। ऐसा इसलिए लिखना पड़ रहा क्योंकि ऐसा होता ही है।

तालाबों से पानी चोरी नवंबर,दिसंबर मे यदि पूर्णरूपेण रुक जाए तो मई-जून मे उत्पन्न होने वाले जलसंकट की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
वर्तमान मे इछावर ब्लाक के शतप्रतिशत तालाब लबालब पानी से इठला रहे हैं इनका इतराना-इठलाना स्वभाविक भी है क्योंकि यह सभी जलाशय प्राकृतिक सौंदर्य मे अपना हिस्सा जो बंटा रहे।
लेकिन तालाब के सीने मे चाकू गाढ़ने वाले लोग भी अपने चाकूओं को धारधार बनाने से नहीं चूक रहे, क्योंकि इन्हें जल्द से जल्द तालाबों को पानी खाली कर "एक पंथ दो काज" करना है अर्थात तालाब से चौरी-छिपे पलेवा,सिंचाई और खाली तालाब पर अतिक्रमण कर उसमे गेहूँ-चने की बुवाई।
इन कामों के लिए भले ही तालाबों की पाल ही क्यों न उन्हें फोड़ना पड़े।

तालाब कुछ दिनों बाद खेत मे तब्दील हो सकते हैं हर वर्ष एेसा ही होता है। परिणाम स्वरुप होली के बाद से ही इछावर तहसील के कई गांव पेयजल संकट की चपेट मे आना शुरु हो जाते हैं। मई-जून तक शासन का करोड़ों-अरबों रुपया पेयजल संकट से निपटने मे फूंक दिया जाता है।

सजग ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के आला अफसर पानी के दोहण को रोकने के लिए कढ़े कदम उठाए। तालाबों से सटे कृषकों को तलब कर उन्हें सख्त हिदायत दे। फिर भी ना माने तो दोषी किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे।

इछावर नगर का नादान रोड स्थित प्राचीन तालाब इस समय लबालब भरा हुआ है। इसकी जान के दुश्मन काश्तकार घात लगाए बैठें हैं। कुछ ही दिनों मे यह तालाब हत्या का शिकार हो सकता है। ग्रामीण बताते हैं कि मोगरा रोड स्थित 'गांव तालाब' भी सुरक्षित नहीं है। यह तालाब पांगरा,मोगरा के काश्तकारों की 'जद' मे है। निपानिया तालाब पर इछावर के किसानों की आँखें गड़ी हुई हैं। छापरा तालाब पर हाल्याखेड़ी,मोलगा के किसान टकटकी लगाए बैठे हैं। गुराड़ी तालाब, बोरदी तालाब,तहसील का दमदार तालाब लसूड़ियाकांगर जलाशय पर भी आसपास के किसानों की गिद्ध दृष्टि बताई जा रही है।

इछावर नगर सहित समूचे ब्ल‍ाक को असमय ही जलसंकट के भाड़ मे झोंकने वालों के संबंधित  विभाग से गहरे संबंध बताए जाते हैं। कारगुजारी करने वाले ऐसे किसानों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है इसी वजह से इनपर कोई ठोस कार्रवाई चाहकर भी प्रशासन नहीं कर पाता। इसबार तहसील की कमान तेजतर्रार एसडीएम प्रगति वर्मा संभाले हुए हैं। नागरिकों का मानना है कि क्षेत्र की प्रगति मे आढ़े आने वाले अवसर परस्तों पर शायद प्रशासन समय रहते नकेल कसेगा!
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तालाबों पर अतिक्रमण का सपना देखना बंद करदें लोग क्योंकि प्रशासन सजग है और यदि किसी ने अवैध रुप से विद्युत पंपसेट,डीज़ल पंपसेट चलाकर पानी चोरी करने या पाल फोड़कर बहाने की कुचेष्टा की तो कानूनी कार्रवाई भुगतने के लिए तैयार रहे। तालाबों पर अतिक्रमण करने वालों पर भी प्रशासन शिकंजा कसने जा रहा है।         

                                          प्रगति वर्मा
                                        एसडीएम,इछावर  

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