आवाज की दुनियाँ के दोस्तों, 
एमपी मीडिया पॉइंट आपके लिए एक गुनगुनाता अवसर लेकर आया है। इस मौके को सीहोर नगर के कराओके गायक भाई डीके मालवीय ने सुगम बनाया है, 1977 में आई फिल्म अनुरोध के गीत से...। फिल्म की कहानी इस शेर के इर्द गिर्द है... 

इधर फ़लक को है ज़िद बिजलियाँ गिराने की 
उधर हमें भी है धुन आशियाँ बनाने की 

.. एक रईस पिता की संतान को गाने का शौक लगता है और बेटा बाप का घर छोड़ कर मशहूर गायक बन जाता है। इसी फिल्म में हिंदी फिल्मों के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना हीरो थे और उनकी साली सिंपल कपाड़िया हीरोइन थी। बात करें प्रस्तुत गीत की... जिसे लिखा आनंद बक्शी ने... जिनका मौके की नजाकत के हिसाब से गीत लिखने में कोई सानी नहीं...इस गाने का शब्द शिल्प भी ऐसा कि....हमको भी हम सफर बना ले...और याद करा दे ..उन गुजरे हुए हसीन पलों को...जो नींद नहीं आने पर...कितने हसीं ख्वाब बुन लेते हैं...जिनमें से कुछ याद रह जाते हैं...कुछ भूल जाते हैं...। गीत को संगीत बद्ध किया लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.... कहाँ पर एकार्डियन बजाना है और कहाँ बायलिन का इस्तेमाल करना है...और कहाँ तबले की थाप दिल में हूक जगाएगी...यही कमाल संगीतकार जोड़ी ने इस गाने में बखूबी किया है। पार्श्व गायक थे रुपहले पर्दे पर... राजेश खन्ना की आवाज बनकर.. उन्हें सुपर स्टार का रुतबा दिलाने वाले.... खंडवा के किशोर दा ने...। किस खास अंदाज में इस गाने को गाया है कि.. गाते हुए जिस समय नायक का दिल रोमांटिक हो जाता है... और रेडियो पर सुनते समय नायिका का... सच में उससे कम रोमांस दर्शक/श्रोता के मन में भी नहीं जागता...। युवक खुद को राजेश खन्ना तो युवतियां खुद को सिंपल कपाड़िया की जगह महसूस करने लगती हैं..। यही इस गीत का असली मजा है... तो आप भी इस मजे से बिल्कुल मत चूकिए... लीजिए मजा... प्रस्तुत गीत का। हालांकि गीत का एक ही अंतरा प्रस्तुत है..। 

शैलेश तिवारी.. संपादक

अब सुनिए, देखिए 



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