"त्रिमूर्ति और तृतीय विश्वयुद्ध"
-----------------
विशेष संपादकीय 

श्रेष्ठता की लड़ाई ही तीसरे विश्वयुद्ध का कारण बनने जा रही है। अमेरिका की दादागिरी से तंग सैकड़ों देश कमजोरी के कारण चुप रहे और "दादागिरी" सहन करते रहे। देखते ही देखते अमेरिका नम्बर-1 बन गया। रशिया के टूटने के बाद वह ओर भी बेलगाम हो गया। परोक्ष रुप से कहें तो विश्व का राजा हो गया।
दूसरी तरफ ड्रेगन अपनी छिपी-दबी चाल से बढ़ा। सन् 1962 मे भारत पर चढ़ाई की, युद्ध हुआ जिसमे भारत ने मात खाई__दुर्भाग्य यह था कि भारत उस समय सिर्फ़ चलना सीख रहा था और उसपर हुए हमले का कोई भी देश विरोध नहीं कर पाया--यही कारण रहा कि इस युद्ध मे हमने वह सबकुछ खोया जिसकी टीस आज भी देश की तीसरी पीढ़ी के मन मे है।

हम राजनीतिक हथकंडों,भाषावाद और जातिवाद के चक्रव्यूह मे फंसकर आगे बढ़ते रहे।
वोट की राजनीति और योजनाएं देश को दीमक की तरह चाट रही थीं....जो आज भी चाट रही हैं लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का खून पानी नहीं हो पाया यही कारण रहा कि आज भारत विश्व के दादाओं से आंख मिलाने की स्थिति मे है।

कोरोना काल के दौरान ताजा स्थिति पर बात करें तो अब अमेरिका और चीन आमने-सामने हैं। इनके बीच युद्ध लगभग तय हो चुका है सिर्फ युद्ध का छुंदा ढूंढा जा रहा है। युद्ध की तैयारी भारत के "महाभारत युद्ध" की तर्ज पर की जा रही हैं।

आबादी के हिसाब से चाइना आर्मी को "कौरव सेना" करार दिया जा सकता है। तीसरा विश्व युद्ध "धर्म युद्ध" होगा और भारत उसी शिविर मे श्री कृष्ण के रुप मे दिखाई देगा जहां धर्म होगा।

यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो भारत फिर "गुरु" यानि श्रीकृष्ण के रुप मे अवतरित होगा। खुद युद्ध मे भाग नहीं लेगा लेकिन जिसपर भारत का वरदहस्त होगा वही युद्ध जीतेगा।
यहां यह भी तय है कि भारत "कौरव सेना" के साथ कदापि नहीं होगा इसीलिए आसानी से समझा जा सकता है कि युद्ध कौन जीतेगा_श्रेय किसको मिलेगा__और ड्रेगन का हाल क्या होगा।

शुरुआत ऐसे हुई है कि अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से अपना नाता तोड़ लिया है...आरोप यह कि WHO पर चीन का कब्जा है। अमेरिका ने WHO की रसद पहले ही रोक ली थी।
दूसरे शब्दों मे कहना ठीक होगा कि चीन का जहां भी अंश दिखाई देगा वहां अमेरिका का कोप सौ गुना दिखाई देता रहेगा। वास्तविक  युद्ध की कूटनीति से प्रेक्टिस जारी है। उसी तरह से जैसे क्रिकेट मे टेस्ट मैच खेलने से पहले प्रादेशिक टीम से तीन दिवसीय और चार दिवसीय मैच खेले जाने की परंपरा है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट भी मैं  शाया कर रहा हूँ पढ़ें 

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO से अपना नाता ख़त्म करने जा रहा है.

ट्रंप ने आरोप लगाया कि WHO कोरोना वायरस के संक्रमण को शुरू में फैलने से रोकने में नाकाम रहा. संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी का फंड राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही बंद कर चुके हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन की कठपुतली है.

ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ़्रेस के दौरान पत्रकारों से कहा, ''हमने WHO में व्यापक सुधार का अनुरोध किया था लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहे. आज से हम विश्व स्वास्थ्य संगठन से अपना नाता तोड़ रहे हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO से अपना नाता ख़त्म करने जा रहा है.

ट्रंप ने आरोप लगाया कि WHO कोरोना वायरस के संक्रमण को शुरू में फैलने से रोकने में नाकाम रहा. संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी का फंड राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही बंद कर चुके हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन की कठपुतली है.
-----
इस ताजा रिपोर्ट के मुताबिक समझा जा सकता है  कि "त्रिमूर्ति और तृतीय विश्वयुद्ध"  शीर्षक से आगे की रचना कैसी होगी। यह वैसे ही है जैसे सुबह फूल की पंखुड़ियों पर ओस के हस्ताक्षर की सुबह---हवा के दुशाले पर गंध की सलवटों सी लहराती सुबह। भौर की सुषमा पर किरण की कविता की सुबह ....
सुबह भारत की होगी_रामकृष्ण के भूमि की होगी। इसमे कोई दो राय नहीं है। विश्व के 200 से अधिक देश "दर्शक" होंगे। 
स्व. दुष्यन्त कुमार की यह पंक्तियाँ चीन के लिए कितनी मौजू हैं ..

"जाने कैसी ऊँगलियां हैं जाने क्या अंदाज़ है,तुमने पत्तों को छुआ था जड़ हिलाकर फेंक दी।इस अहाते के अंधेरे मे धुआँ-सा भर गया,तुमने जलती लकड़ियाँ शायद बुझाकर फेंक दी।"

तृतीय विश्वयुद्ध उसमे त्रिमूर्ति अमेरिका,चीन,शिव का तृतीय नेत्र भारत और कुछ नहीं ...
जगतगुरु श्रीकृष्ण का नया अवतार (भारत)
Share To:

Post A Comment: