लेखिका 

भुला पाओगे


छोड़ यूं मुझको अब जाओगे 
क्या उन वादों को भुला पाओगे

समुंद्र की लहरों सी ये आहें
क्या इन ऊँची आहों को मिटा पाओगे

ये दृश्य, ये नज़ारे , ढलता सूरज उगते तारे
क्या मुझबिन इनसे नज़रे मिला पाओगे

उंघते रातों में जब जाएगा मेरा नज़र उस चाँद पर
क्या तुम उसे देख खुद को साबित कर पाओगे

पल भर की देरी में आँखे भर आती है मेरी
यूं बिछड़ मुझसे ये आँसू पोंछ पाओगे

सुनो न ! अब मैं कोई ज़िद न करूँगी
क्या बस एक बार मुझको अपना पाओगे

हाँ!! माना मैं राधा हूँ , नही मेल हमारा
फिर भी बोलो क्या पाक प्रेम निभा पाओगे

वादा है मेरा मैं तुम्हारे राह न आउंगी
पर बोलो, जहां शामें गुज़री है हमारी उन रस्तो को भुला पाओगे ।

रागिनी झा 'एहसास'

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परिचय

रागिनी झा 'एहसास' दरभंगा , बिहार  की निवासी हैं। स्नातक अंतिम वर्ष में है। वर्तमान निवास मयूर विहार , दिल्ली है।  साहित्य सेवा में संलग्न हैं। लफ़्ज़ों की गठरी (साझा काव्य संग्रह)नामक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। 
एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है। 
संपादक
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