लेखिका 

"माँ मन्दिर और शिवाला  है "🌹🌹❤🌹 माँ को समर्पित 

माँ संस्कारों की माला है!
माँ मन्दिर और शिवाला है !!

माँ सर्दी की कोमल धूप पगी!
माँ साँझ ढले ज्यों दीप जली !

माँ रूप सलोना स्वर्ण विभा !
छलकी लहरों पर किरण प्रभा !

माँ अनवरत प्रवाहित  गंगाजल!
माँ जीवनदायी नदियाँ कल कल !

माँ नेह मयी तुलसी बिरवा!
माँ शीतल सुवासित ज्यों पुरवा!

माँ वाणी नुपूर धुन पैजनी !
माँ आँचल ज्यों शीतल रजनी !

माँ लगती मिष्ठी झरने सी!
सुन कष्ट मिटे सब दुख हरती !

माँ  दुर्गा  है  माँ  काली  है!
माँ  रक्षिता शेरावाली  है !

माँ अन्नपूर्णा माँ जन्मदात्री !
माँ मान सम्मान अधिष्ठात्री!

माँ मोती शुचि उज्जवला है !
माँ तेरे चरण तीर्थ निर्मला है!

किरण मिश्रा "स्वयंसिद्धा "
नोयडा
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