लेखिका
तेंदू पत्ता तुड़ान करते हुये एक दिन
मेरे ही धधकती जवानी से
ठेकेदार ने जब बीड़ी सुलगा ली तो
मैं नहीं बची
गुम हो मिल गई
दंडकारण्य की गुमनाम कहानियों में
लेकिन कहते है न
कुछ बचा रह जाता है
सो बची रही
नख भर उम्मीद नख भर ताकत
उसी से ले हाथ में बगावत की विरासत
गांधी के न्यासिता के सिद्धांत को नकारा
लैण्ड माईन बिछाई लाल विचारों की
और कर दी घोषणा क्रांति की
उखाड़ फेका सत्ता, पुलिस, सेना को
हो कर खुश हवा में उठाया हांथ
मुठ्ठी बंद की और जोर से चिल्लाई
आजादी
मैं आजाद थी
वर्ष बीते, बीते आजादी के ढंग
देख रही हूं हर तरफ
सिद्धांत परिभ्रमण का।
लोमड़ी जिसे मिली थी आजादी
बन के वो शेर शासक कहला रही है
अधोवस्त्र फेक बीड़ी सुलगा रही है
मैं क्रांति की बात करने वाली
खुराक बन सत्ता की
कब की शेरों के गले उतर चुकी हूं
मार्क्स तैयार है वर्ग संघर्ष के लिए
सलामी दे
हवा में हाथ.....
आपके लेख एवं कविताएँ विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।
आकाशवाणी के राष्ट्रीय चैनल में कविता पाठ भी कर चुकी हैं। समाजशास्त्रीय पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही अनेक शोध पत्र -राष्ट्रीय /अंतरष्ट्रीय शोध -पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आप एक पत्रिका की संपादकीय मंडल की सदस्य भी हैं। आपको अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है।
संपादक
आजादी
---------------तेंदू पत्ता तुड़ान करते हुये एक दिन
मेरे ही धधकती जवानी से
ठेकेदार ने जब बीड़ी सुलगा ली तो
मैं नहीं बची
गुम हो मिल गई
दंडकारण्य की गुमनाम कहानियों में
लेकिन कहते है न
कुछ बचा रह जाता है
सो बची रही
नख भर उम्मीद नख भर ताकत
उसी से ले हाथ में बगावत की विरासत
गांधी के न्यासिता के सिद्धांत को नकारा
लैण्ड माईन बिछाई लाल विचारों की
और कर दी घोषणा क्रांति की
उखाड़ फेका सत्ता, पुलिस, सेना को
हो कर खुश हवा में उठाया हांथ
मुठ्ठी बंद की और जोर से चिल्लाई
आजादी
मैं आजाद थी
वर्ष बीते, बीते आजादी के ढंग
देख रही हूं हर तरफ
सिद्धांत परिभ्रमण का।
लोमड़ी जिसे मिली थी आजादी
बन के वो शेर शासक कहला रही है
अधोवस्त्र फेक बीड़ी सुलगा रही है
मैं क्रांति की बात करने वाली
खुराक बन सत्ता की
कब की शेरों के गले उतर चुकी हूं
मार्क्स तैयार है वर्ग संघर्ष के लिए
सलामी दे
हवा में हाथ.....
डा. किरण तिवारी
---------------परिचय
डॉ किरण तिवारी , समाजशास्त्री एवं शैक्षणिक सलाहकार, इग्नू ,पूर्व प्राचार्या डिग्री कॉलेज कानपुर से हैं।आपके लेख एवं कविताएँ विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।
आकाशवाणी के राष्ट्रीय चैनल में कविता पाठ भी कर चुकी हैं। समाजशास्त्रीय पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही अनेक शोध पत्र -राष्ट्रीय /अंतरष्ट्रीय शोध -पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आप एक पत्रिका की संपादकीय मंडल की सदस्य भी हैं। आपको अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है।
संपादक


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