मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग 
भाजपा में अंतर्कलह---विजया पाठक

एडिटर, जगत विज़न विजया पाठक 

मध्य प्रदेश में राज्यसभा के 3 में से 2 सीटों पर भाजपा काबिज हो गई 
है l लेकिन फिर भी पार्टी में अंदर खाने हड़कंप मचा हुआ है l इसकी वजह है कि भाजपा के विधायक गोपीलाल जाटव की क्रॉस वोटिंग l गुना से बीजेपी विधायक गोपीलाल जाटव का वोट कांग्रेस के खाते गया l जाटव ने इसे भले ही सफाई दी है कि वह महेज चूक है, लेकिन पार्टी इसे इतने हल्के में लेती नहीं दिख रही l हालांकि इससे चुनाव नतीजों पर कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या बीजेपी का मैनेजमेंट फेल हो गया ? वों पार्टी के इस विधायक को अपने साथ क्यों नहीं रख पायी l बीजेपी विधायक ने पार्टी लाइन से अलग जाकर ऐसा क्यों किया l गुना ज्योतिरादित्य सिंधिया का क्षेत्र है l तो क्या जाटव सिंधिया के आने से खुश नहीं है l यहां बता दें कि गोपीलाल जाटव वरिष्ठ नेता है और सिंधिया की गुना शिवपुरी संसदीय सीट से आते हैं l जब सिंधिया कांग्रेस में थे तब जाटव  उनके क्षेत्र से जीतकर आए थे l कुल मिलाकर 230 विधानसभा सीट वाले मध्यप्रदेश के राज्यसभा सीटों के लिए मतदान में सिंधिया को 56,दिग्विजय सिंह को 57 और सुमेर सिंह सोलंकी को 55 वोट मिले l जबकि कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार फूल सिंह बरैया के 36 वोट ही मिले l
दरअसल राज्यसभा चुनाव में यह तो पहले से ही तय माना जा रहा था कि 3 में से 2 सीटें बीजेपी और 1 सीट कांग्रेस के पाले में जाने वाली है l लेकिन जाटव ने क्रॉस वोटिंग कर बीजेपी को बेचैन जरूर किया हैl क्रॉस वोटिंग के बावजूद पार्टी ने जाटव पर अभी तक कोई कार्यवाही भी नहीं की हैं l पार्टी को पता है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की 24 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं l और गोपीलाल जाटव उसी क्षेत्र से आते हैं जहां पर उपचुनाव होने वाले हैं l यही कारण है कि अभी पार्टी किसी भी स्थिति में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती हैं l जाटव अपने क्षेत्र में काफी प्रभाव रखते हैं l उनकें समाज का अच्छा खासा वोट बैंक हैं l क्रॉस वोटिंग के मामले में भी निकालें जा रहे हैं कि सिंधिया के आने से बीजेपी के अंतर्कलह बढ़ी है l अंदरूनी तौर पर बीजेपी विधायक सिंधिया के आने से खुश नहीं हैं l निश्चित तौर पर उपचुनाव पर इसका असर देखने को मिलेगा l खासकर टिकट बंटवारे के वक्त यह अंतर्कलह खुलकर सामने आएगी l क्योंकि इस उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार तय है और जो उम्मीदवार है वह कांग्रेस से पाला बदलकर भाजपा में आए हैं वही है तो असंतोष उन लोगों में होगा l जो वर्षों से बीजेपी में उन्हें मौका ही नहीं मिलेगा l ऐसी स्थिति में इन उपचुनावों  में जीत हासिल करना बहुत कठिन होगा l आज बीजेपी भले ही कह रही है कि सिंधिया और उनके समर्थकों के आने से पार्टी में किसी भी प्रकार की अंतर्कलह नहीं है लेकिन पार्टी को अंदरूनी कलह को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए l इन उपचुनावों में ही सरकार का भविष्य टिका है l उपचुनावों कों सबको साधना और एक करना बहुत आवश्यक है l वैसे भी क्षेत्र में सिंधिया का प्रभाव काफी कम हुआ है l वह अपने संसदीय क्षेत्र से चुनाव तक हार गए हैं l इसका मतलब साफ है कि अकेले सिंधिया  के भरोसे भी जीत हासिल नहीं हो सकती l फिलहाल बीजेपी को अपनी  अंतर्कलह को समाप्त करना होगा l समय रहते असंतुष्ट नेताओं को एक करना होगा l
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