मध्यप्रदेश का मिनी पचमढ़ी नरसिंहगढ़

सरोज कुमार द्विवेदी, नरसिंहगढ़

 विंध्याचल की सौगंध पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ नरसिंहगढ़ नगर का सौंदर्य वर्षा ऋतु के दौरान देखते ही मन पुलकित हो जाता है।

बढ़ते हुए झरने ,विशाल वन क्षेत्र, प्राचीन महादेव मंदिर, रियासत दौर का किला, आलोकिक रचना यहां विद्यमान है। 
समीपस्थ श्यामजी शाखा आज वाली कोटरा में भी कुछ ऐसा ही जाजरा और ऐतिहासिक के प्रमाण और दर्शन होते हैं।
वन अभ्यारण में हिरण चीतल मयूर बाहुतालय है।
 नगरीय क्षेत्र में काले और लाल मुंह के बंदर से सहजता से दिख जाते हैं। 
पहाड़ी क्षेत्र के वनों के बीच प्राचीन नदियां पानी और गोद पानी नाम के प्राचीन शिवालय हैं। यहां भीषण गर्मी के दिनों में भी पानी उपलब्ध रहता है। कुदरती स्वीमिंग पुल वर्षा काल में जन आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। 
पहाड़ियों में श्री हनुमान जी, श्री माताजी आदि के प्राचीन स्थल है। 35 हजार की आबादी वाला नरसिंहगढ़ नगर अपने सौंदर्य की गाथा खुद ही बयां कर देता है।
नरसिंहगढ़ को बेहतरीन फिजा़ और प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण आज मध्यप्रदेश का मिनी पचमढ़ी कहा जाता है। वर्षाकाल के दौरान यहां पहुंचने वाले सैलानियों का लगाव अचानक ही नरसिंहगढ़ के प्रति जो उभरकर आता है वह अवर्णित हो जाता है। नरसिंहगढ़ की भाषा को मिश्री से भी मीठा माना जाता है। सौहार्द और सात्विकता के मामले मे नरसिंहगढ़ का नाम आदर से लिया जाता है। लेकिन मध्यप्रदेश का यह मिनी पचमढ़ी शासन की नजरों से दूर है।
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