दस दिन में बिजली के बिल का भुगतान कम नहीं किया तो जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद करेगी उग्र प्रदर्शन,
जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने लगाया विद्युत कंपनी पर मनमानी का आरोप

सीहोर,   एमपी मीडिया पाइंट  ैै 

जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद और शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने शहर के पावर हाउस चौराहा स्थित विद्युत कंपनी में पहुंचकर दस दिन में बिजली के बिल का भुगतान कम करने के संबंध में अस्टिेंट इंजीनियर  को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है। इस मौके पर जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद की महिला विंग की अध्यक्ष श्रीमती मोहिनी अग्रवाल ने बताया कि उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी मनमाने बिजली बिल थमा रही है। ऐसे में अधिक बिल आने पर उपभोक्ता उसमें सुधार के लिए कंपनी कार्यालय पहुंच रहे हैं। यहां लंबी लाइनें लग रही है। लाइन में लगने के बाद भी उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में सुधार एक औपचारिकता ही दिखाई दे रही है। इससे उपभोक्ता परेशान होकर कंपनी कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं अधिकारी और कर्मचारी उपभोक्ताओं की समस्याओं का उचित समाधान नहीं कर रहे है। उन्होंने बताया कि मेरे घर का ही बिजली का बिल करीब 12 हजार 841 रुपए आया है। इसकी शिकायत मैंने की है। इसके अलावा सैकड़ों उपभोक्ता ऐसे है जो आफिस के चक्कर नहीं काट कर चुपचाप भुगतान कर रहे है। 
इधर शहर कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश भूरा यादव ने कहा कि इन दिनों यूनिट बढऩे से करीब 1500 उपभोक्ता इंदिरा ज्योति योजना बाहर हो गए हैं। अब तक 500 से 700 रुपए तक आने वाला बिल अचानक दो से तीन गुना अधिक तक पहुंच गया है। लॉकडाउन के दौरान मीटर की रीडिंग नहीं हो सकी। मार्च की आंकलित खपत के मान से बिल वसूले। अब मनमानी रीडिंग के बिल थमा दिए। बगैर रीडिंग लिए बिल में मीटर की वास्तविक खपत से अधिक दर्ज कर दिया गया है। उपभोक्ताओं ने इसकी शिकायत भी कंपनी को की है। इसके अलावा कुछ उपभोक्ताओं को आंकलित खपत के आधार पर मनमाने बिल थमा दिए। इसके ऊपर कंपनी का तर्क यह है कि पिछले माह गर्मी में घरों में खपत अधिक हुई, इस वजह से उपभोक्ताओं के बिल अधिक आए हैं। 
बंद दुकानों के आ रहे हजारों के बिल
श्री यादव ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते लागू लॉकडाउन में करीब ढाई महीने तक घर बैठे दुकानदारों को बिजली बिल की चिता सता रही है। उनका कहना है कि पहले तो लॉकडाउन ने धंधा चौपट कर दिया और अब भारी भरकम बिल ने परेशानी बढ़ा दी है। दुकानें बंद होने के बावजूद हजारों रुपये का बिल आ गया है। यही नहीं उसमें सरचार्ज भी काफी जोड़ा गया है, इसलिए सरकार को चाहिए कि दुकानदारों से बिजली के बिल न ले, क्योंकि लॉकडाउन में उन्होंने बिजली का प्रयोग ही नहीं किया। उन्होंने कहा कि कंपनी के आफिस में संशोधन कराने के लिए मेला लगा हुआ है। बिजली बिल जमा करने पहुंचे लोगों ने बताया कि कुछ लोगों के बिल में संशोधन किया गया है। जबकि कुछ लोगों को ये कहा जा रहा था कि आपके रीडिंग बिल है। उसे तो आपको भरना ही पड़ेगा। ऐसे में उन गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। जिनको रीडिंग बिल के नाम पर 4 से 5 हज़ार रुपए के बिल थमा दिए गए हैं। अब जब उनके सामने घर परिवार का खर्च वहन करने का संकट है और उनकी जेब में काम बंद होने के कारण पैसा तक नहीं है। वे लोग 4 से 5 हजार रुपए के बिजली बिल कैसे भरेंगे। इस मौके पर प्रीतम दयाल चौरसिया, हरीश आर्य, जिला उपभोक्ता परिषद के हीरु बेलानी, नरेन्द्र डाबी आदि बड़ी संख्या में उपभोक्ता शामिल थे।
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