सिकंदर कहलाना ही होगा
आज अंधेरा है तो कल सवेरा भी होगा,आज तकलीफ़ में हैं,
पर, कल खुशियों का जहां तेरा भी होगा,
माना, तकलीफ़ बहुत है ज़िन्दगी में,
पर, इस वक्त को भी गुजरना ही होगा,
हारी हुई है ज़िन्दगी तो जीत का उजाला भी होगा,
मौत तो तेरा लक्ष्य नहीं,
जिन्दगी के मुश्किलों को हंस कर पार करना ही होगा,
आज परेशान हैं जिन्दगी तो कल बहारो का समां भी होगा,
खुद से मत हार तू, खुद के हौसलों को खुद बढ़ाना ही होगा,
जीत कर जंग जिंदगी से,
एक दिन सिकंदर कहलाना ही होगा...
--मनीषा सिंह रानीडंगा, पश्चिम बंगाल
-----------------------परिचय
लेखिका मनीषा सिंह जी सिलीगुड़ी के रानीडंगा (पश्चिम बंगाल) से हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी मनीषा जी कविता लिखने के साथ-साथ संगीत से भी जुड़ी हैं। एनएसएस के माध्यम से समाजसेवा मे भी अमूल्य योगदान देती रहती हैं। आप जिला स्तर पर कई काव्यमंचों को सुशोभित कर चुकी हैं। साथ ही विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों मे आपकी कविताओं का प्रकाशन अक्सर होता रहता है। साहित्य और संगीत से जुड़ी इस प्रतिभा का एमपी मीडिया पाइंट पर स्वागत है।संपादक


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