लेखिका 

पायदार 

हम मुस्कुराते रहे गमे - दिल सुनाते रहे   
हमें रोने की आदत नहीं हम मुस्कुराते रहे
एहसासों को हम गुनगुनाते रहें
गमे - दिल बयां करते रहें 
वफ़ा सबसे करते रहें 
शिद्दत से रिश्ते निभाते रहें 
दूर होकर भी हम तेरे रूबरू रहें 
 हमें रोने की आदत नहीं हम मुस्कुराते रहे
कोई अपना नहीं कोई पराया नहीं
ज़िंदगी से सबक सीखते रहें 
तुम ठेस लगाते रहें 
हम तेरे सीतम को सहते रहें  
हम साथ देते रहें 
तुम दामन बचाते रहें 
हम मुहोब्बत करते रहें 
तुम ताल्लुक कम करते रहें 
हम पुकारते रहें 
अपने तलबगार को तलाशते रहें 
हमें रोने की आदत नहीं 
हम मुस्कुराते रहें l

अर्चना ‘आर्ची’     जकार्ता , इंडोनेशिया

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