लेखिका 


--मिलूंगी तुमसे तुम्हारे ख्याल में--


प्रिय मेरे ..मैं मिलूँगी तुमसे ,
कलरव करती चिड़ियों की मधुर चहचहाहट में ।
 गुलमोहर के रंगों में  जेठ की गर्म हवाओं में ,
शाम ढ़लते सूरज की लालिमा चाँद की अटखेलियों में ।।

शबनम की मदहोशियाँ में सावन के झूलो में ,
बारिश की बूँदों में  पूस के कोहरों में ।
आँखों की कोर से बहते आंसूओं की बूंदों में,
हमारे मिलन वाले लम्हों के लफ़्ज़ों में ।।

हर इश्क़जादों के इश्क़ की ज़िक्र में ,
हीर-राँझा के मोहब्बत की फ़िक्र में ।
प्यार के जुनून  महादेव के सुकून में ,
किसी की दुआओं मे........। ।

पति-पत्नी के मन-मुटाव में,
 मैं मिलूँगी तुमसे मेरे जाना ।
सिर्फ तुम्हारे ही ख़याल में ,
तुम्हारे मन में ..मेरे तन में ।।

हम दोनों की तेज साँसों की रफ़्तार में ,
हम दोनों की धड़कनों की आवाज़ में ।
हर उस टीस में जो उठती है हमारे पिछले दिनों के ,
लगाव में  और आज के हुए इस अलगाव में।।


ज़िन्दगी के दूसरे छोर पे झूठ और सच से परे ,
मैं मिलूँगी तुमसे.. सिर्फ़ तुम्हारे ख़याल में ।
ज़िंदगी से परे .. सिर्फ़ तुम्हारे ख़याल में ,
मैं मिलूंगी तुमसे ठीक बिल्कुल वैसे ही ।।

एक लंबे अरसे के इतंज़ार के बाद 
जैसे चातक मिलती है बारिश से।

सुनों प्रिय!
तुम भी मिलना मुझसे वैसे ही ।
 एक लंबा रास्ता तय करने के बाद,
जैसे मिल जाती है नदियां सागर में।।

हम मिलेंगें और  जरूर मिलेंगे 
होगा जब समय स्वाति नक्षत्र का।
जहाँ सारे रास्ते ख़त्म हो जाएंगे,
हम मिलेंगे उस वक़्त ।।

जब चातक भी मिल जाएगी बारिश से ,
जब होगी नदियां सागर के मिलन की पूरी ख्वाहिश।।

सुनों प्रिय!
जब कभी तुम्हें यूँ ही एकांत में ,
बैठे -बैठे आए मेरा ख्याल और मैं मिलूँ नहीं तुम्हें कहीं।
तो तब मुझे कभी मेरे घर के पते पर मत ढूँढना ,
वहाँ तुम्हारी वाली ‘मैं’ नहीं रहती ।।


मेरे पास लोगों के इस सवाल का ,
कोई जवाब ही नहीं है कि ,
"अगर तुम मुझे न मिले तो.."?

ये सवाल  कभी आया  नहीं ज़हन में मेरे,
जब तुम मिले थे तब भी नहीं ।
जब तुम बिछड़ गये  तब भी नहीं,
क्योंकि मैं जानती हूँ  ..।।

इस  सवाल का  जवाब सिर्फ "इंतज़ार" है ,
तुम्हारा इंतज़ार..हा सिर्फ तुम्हारा इंतज़ार  ।

 यही सीखी हूँ तुम्हारे इश्क़ में,
इंतज़ार करना इस जन्म में ,
यही करती रहूंगी अपनी अंतिम सांस तक।
ये इंतज़ार फिर उधार रहेगा तुम पर 
अगले जन्म तक  युगो -युगो तक ।।


 हमारी प्रेम कहानी में कुछ ख़ुशनुमा हो न हो, 
एक रात बेहद खूबसूरत होगी ।
जब आसमान में खिलेगा पूनम का चांद, 
और बैचैन होंगी शीतल हवाएं।।

गिरेंगे आंसू हम दोनों के आँखों से तब ,
हम दोनों कर रहें होंगे विरह के दर्द को कम ।
तब वो चाँद वो तारे बनेंगे साक्षी प्रेम के हमारे,
ख़ामोश जुबां और बिलखती आंखों को देख ।।

मन जब चाहेगा एक आख़री बार लिपटने को,
जार-जार रोने को और इक दूजे मे सिमटने को।
 एक दूसरे के ना हो पाने की टीस,
 रोक लेगा हमें उस अंतिम आलिंगन से ।।

हम एकटक निहारेंगे एक दूजे को, 
पकड़ कर हाथ तब तक.. ।
जब तक दोनों कि पलकें गीली ना हो जाएं, 
फिर एक झूठी मुस्कान के साथ हम लेंगे विदा।।

 खा कर क़सम की  चाहे कुछ भी हो जाए, 
हमदोनों कभी नहीं रोयेंगे बड़े हो गए हैं हम ।
ये बचकानी रोने-धोने की हरकत फिर न कभी करेंगे ,
एक-दूसरे से लिपटकर न रो पाने की कसक लिए ।।

सिसकते हुए छोड़ देंगे एक दूसरे का हाथ और ,
बढ़ जाएंगे आगे  अपने-अपने रास्तों पर।
 मग़र देखेंगे बार-बार मुड़कर एक-दूसरे को,
 जब तक हम एक दूसरे की आंखों से बह नहीं जाते।।

 तुम देखना रात पूनम की वो विरह वाली रात,
कितनी खूबसूरत होगी हाँ बेहद खूबसूरत होगी ।
क्योंकि उस रात एक वादा करेंगे हम दोनों ,
मिलेंगे जरूर फिर किसी रोज किसी जन्म ।।

 सुनों प्रिय!
हम मिलेंगे जरूर क्योंकि ,
हर किसी के मिलने का समय निश्चित होता है ।
हाँ, मैं मिलूंगी तुमसे,सिर्फ तुम्हारे ख्याल में ,
सिर्फ तुम्हारे ख्याल में..।।


रीमा मिश्रा नव्याआसनसोल(पश्चिम बंगाल)

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परिचय

रीमा मिश्रा " नव्या " आसन सोल ( पश्चिम बंगाल) से हैं। पेशे से आप शिक्षिका हैं लेकिन देश के विभिन्न समाचार पत्रों पर आपके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। आपको आसन सोल नगर निगम से हिंदी पत्रकारिता का सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। प्रकाशित लेख में लेखिका के अपने निजी विचार हैं। जिनमे लेखिका ने कोरोना के कहर के बीच अपने बुजुर्गों के सेवा और देखभाल का संदेश दिया है। भारतीय परिवारों में बुजुर्गों की उपेक्षा को फोकस भी किया है। यह लेख बहुत संवेदनशील है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक
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