सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट 


राजेश शर्मा 

वैसे तो एमपी मीडिया पाइंट की कभी भी तासीर नहीं रही रेत मे से तेल निकालने की, लेकिन जब मामला हद से गुजर जाता है तब आखिर मे लिखना-पढ़ना पड़ता है कि अब तो शिकारी खुद शिकार होने लगे हैं। आखिर क्या कारण है कि रेत माफियाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही? चंबल को भी तो हमने कभी डाकुओं से मुक्त किया।, हमने खालिस्तान की मांग करने वालों को स्वर्ण मंदिर से खदेड़ा, हमने कश्मीर की धारा 370 डंके चोट पर हटाई, छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को नकारा, चाइना को मजे चखा रहे हैं। फिर क्या बात या क्या लचरता है कि हमे लगातार रेत माफिया चुनौती दे रहे हैं और हम उनका कुछ नहीं उखाड़ पा रहे हैं!!

पहली मर्तबा रेत कांड पर न्यूज़ शाया हो रही है। शायद अधिकारी चेत जाएं, अपने कानून प्रदत अधिकार को समझ जाएं और वह कर डालें जिसकी अपेक्षा जनमानस उनसे करता आया है। 

अभीतक जिन पत्रकारों ने "रेत" पर विभिन्न ग्रुपों मे लिखा, दरअसल उनकी रसद बंद थी लेकिन आज पहली बार यदि एमपी मीडिया पाइंट को लिखना पड़ रहा है तो बात पक्की है कि सिर के ऊपर से पानी निकल रहा है। वर्दी से छेड़छाड़ !! मुझे यह वाक्या नहीं पच रहा, जो भी दोषी हो स्पाट पर फैसला होना चाहिए ताकि अगली बार कोई दूसरा हिमाकत न कर सके।

ताजा मामला यह है कि

सीहोर जिले की बुधनी में रेत माफिया ने आरक्षक पर चढ़ाया रेत से भरा टेक्टर ट्राली,
 आरक्षक के दोनों पैरों में गंभीर चोट,
पूरा मामला रेहटी के जहाजपुरा रेत खदान का  देर रात को कीर मकोडिया के तीन टेक्टरो से अबैध रेत का उत्खनन व परिवहन किया जा रहा था। जिसकी सूचना मिलने पर  सलकनपुर चौकी प्रभारी राजू मखोड दल-बल के साथ पहुंचे , जहां आरक्षक धर्मेद्र ने अवैध तरीके से रेत ले जाते ट्रेक्टर ट्राली को रोकने का प्रयास किया, जिस पर आरक्षक धर्मेंद्र के ऊपर ही रेत से भरी टेक्टर-ट्राली चढ़ा दिया गया। गंभीर हालत में आरक्षक को होशंगाबाद रेफर किया गया है।
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कानपुर का विकास दुबे वाला कांड अगर पुलिस प्रशासन को अपना कर्तव्य याद दिलादे तो संभवतया बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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