लेखिका और चित्रण
दुःख झेले हैं मैंने भी बहुत भले छोटी बच्ची हूँ
तुमने झेला तो कौन सा तीर मार दिया बताओ,,
ग़रीबी क्या होती है कभी गरीबों के घर जाओ
भाषण देते राशन देते, ग़रीब बनके मुस्कुराओ,,
मेहनत से मज़दूरी करके घर का खर्च चलाओ
अकल ठिकाने लग जाएगी मुस्कुरा के बताओ,,
पढ़े लिखे कमा लेते, अनपढ़ बन कर कमाओ
नमक रोटी से गुज़ारा करके, हँस के बतलाओ,,
तनख्वाह देते मालिक कभी नौकर बन जाओ
नौकर बनके तनख्वाह ले घर का खर्च उठाओ,,
ग़लती तुम्हारी माफ़ी लायक गरीबों को सताते
ग़रीब को लूट तुम खाते, भाषण देने चले आते,,
सरकारी खज़ाना तुम लुटाते गुनेहगार ठहराते
एक ग़लती भी हो जाए तो सज़ा सुनाके जाते,,
जनता को गुमराह करते, समाज़ को लूट खाते
कोई ग़लती हो भी जाए माफ़ी माँग जीत जाते
संपादक
दुःख झेले हैं मैंने भी बहुत भले छोटी बच्ची हूँ
तुमने झेला तो कौन सा तीर मार दिया बताओ,,
ग़रीबी क्या होती है कभी गरीबों के घर जाओ
भाषण देते राशन देते, ग़रीब बनके मुस्कुराओ,,
मेहनत से मज़दूरी करके घर का खर्च चलाओ
अकल ठिकाने लग जाएगी मुस्कुरा के बताओ,,
पढ़े लिखे कमा लेते, अनपढ़ बन कर कमाओ
नमक रोटी से गुज़ारा करके, हँस के बतलाओ,,
तनख्वाह देते मालिक कभी नौकर बन जाओ
नौकर बनके तनख्वाह ले घर का खर्च उठाओ,,
ग़लती तुम्हारी माफ़ी लायक गरीबों को सताते
ग़रीब को लूट तुम खाते, भाषण देने चले आते,,
सरकारी खज़ाना तुम लुटाते गुनेहगार ठहराते
एक ग़लती भी हो जाए तो सज़ा सुनाके जाते,,
जनता को गुमराह करते, समाज़ को लूट खाते
कोई ग़लती हो भी जाए माफ़ी माँग जीत जाते
प्रियंका भारद्वाज, दिल्ली
---------परिचय
प्रियंका भारद्वाज, दिल्ली की निवासी हैं। गृहिणी होने के साथ साथ साहित्य में रुचि रखती हैं। अपनी कविताओं के तीखे तेवर को लेकर आपकी रचनाएँ चर्चित हैं। रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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