लेखिका 


प्यार,

हस्तलिपि सरीखा है -- अनोखा 
प्रिय ही पढ़ पाता है जिसे 

भीगती है - वह 
अपनी ही बरसात में 
तपी हैं-- वह 
अपने ही ताप में 

प्रणय के स्वर्ण भस्म में 
तब्दील हो जाने के लिए 

अपने प्रेम में
रहती है वह 
उसका प्रेम ही उसकी अपनी
देह है , 
जिसमें जीती है वह 
अस्तित्व से 
अस्मिता की तरह 
सांसें जीती है - देह
देह जीती है -धड़कनें
धड़कनों की ध्वनि से 
रचाती हैं ,, शब्द
हस्तलिपि में बदलने के लिए 
और उखरती हैं -- हृदय लिपि ।।
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मेरा आग्रह ।

उसको देखा भी नही,
निहारा भी कभी नही,
और, वो मेरा भी नही,
उस पर अधिकार भी नही।
उसे सुना है बस मैने,
सराहा है बस मैंने,
कभी डरती हूँ, 
हकीकत क्या है, शक करती हूँ।
सोचती हूँ, 
भीतर कैसे आया वो।
शायद दिल मे मेरे कोई न था,
ये भांप गया वो, मैअकेली सी हूँ,
कुछ कुंठित सी हूँ,
कुछ टूटी सी हूँ,
कुछ भोली भी हूँ ।
वो भी ऐसा है क्या, 
वो भी अकेला सा है क्या,
कुछ खाली सा है क्या,
अनसुनी कहानी सा है क्या।
तो आ जाए वो फिर,
 स्वागत है मेरे आगोश में।
यूं करले अधिकार मुझ पर
मैं उस सी हो जाऊं,
वो मुझसा हो जाये।
और यूं तो यूं ही सही,
कुछ अपना सा,
 अपनापन हो जाये
और खुशियों की सी ,
बरसात हो जाये।
थोड़ा वो जी ले, 
थोड़ा मैं भी जी लू,
उसके सहारे जीवन को।
मेरे रिक्त बने जीवन को वो ,
एक नया नाम दे जाए,
अपने अनसुलझे सवालो का,
चाहे तो वो जवाब ले जाए।

लेखिका...अर्चना दुआ

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परिचय

अर्चना दुआ , देश की राजधानी दिल्ली में निवास करती हैं। आप शिक्षिका,लेखिका, कवियत्री,, वॉयस ओवर आर्टिस्ट,मंच संचालिका,समाज सेविका आदि बहु आयामी व्यक्तित्व की धनी हैं।  अपने लेखिका व कवियत्री होने का श्रेय अपने माता पिता को देती हैं। इनकी रचनाएं,लेखन लोगों के दिल ही नहीं रूह को भी आनंदित करती हैं।1998,,1999 में मंडी हाउस में नाटकों में भी अपना अभिनय का जौहर दिखला चुकी हैं। समय समय पर बच्चों के लिए THEATER WORK SHOPS का आयोजन करती रहती हैं। IFM RAINBOW के sponsored show,मैं और मेरी तन्हाई,,फेम ,, कार्यक्रम में आपकी रूहानी आवाज़ ने शमां बांध दिया। कई सालों से स्कूल चलो अभियान चला कर,सभी बच्चों को विद्यालय जाकर पढने के लिए जागरूक करती हैं।इनके यू ट्यूब चैनल अनकहे अल्फ़ाज़ अर्चना पर आप इनकी कविताएं देख और सुन सकते हैं।आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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