जिस तरह राष्ट्रध्वज को अपनाया, उसी तरह लोकतांत्रिक-संवैधानिक व्यवस्थाओं को अपनाते हुए शीघ्र अपना पंजीयन भी करवाये आरएसएस,

कांग्रेस को अब उम्मीद है कि गोडसे का महिमामंडन छोड़, भविष्य में महात्मा गांधी जी का भी सम्मान करेंगे संघ के लोग
भोपाल, 15 अगस्त 2020
एमपी मीडिया पाइंट 

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा ने 15 अगस्त को जारी अपने वक्तव्य में कहा कि यह सुखद है कि वर्षों तक अपनी शाखाओं पर तिरंगा नहीं फहराने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी, अपनी शाखाओं पर अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना प्रारंभ कर दिया है। 
कुछ वर्षों पूर्व कांग्रेस द्वारा संघ की शाखाओं पर जाकर तिरंगा फहराए जाने के बाद प्रारंभ हुआ यह सिलसिला, दरअसल वह असली राष्ट्रवाद है, जिसका नाम ले लेकर संघ राजनीति तो करता रहा लेकिन वर्षों तक उसने तिरंगे और राष्ट्रपिता जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का कभी सम्मान नहीं किया, न ही उसने कभी इस देश के संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक समरसता, सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब को ही कभी महत्त्व दिया। 

अपने वक्तव्य में प्रवक्ता ने आगे कहा कि संघ द्वारा अपनी शाखाओं पर तिरंगा फहराए जाने के सकारात्मक कदम के बाद, उसे अब यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी विचारधारा के लोग, आजादी के आंदोलन के शहीदों और उस राष्ट्रपिता का भी सम्मान करें, जिनके नेतृत्व में आजादी का पूरा आंदोलन चला क्योंकि समय-समय पर संघ की विचारधारा से जुड़े लोग, यहां तक कि सांसद भी, गोडसे का महिमामंडन करते हुए राष्ट्रपिता के लिए अपमानजनक टिप्पणियां करते रहे हैं। 

प्रवक्ता  ने आगे कहा कि लगता है कि आजादी के आंदोलन में अपने शून्य योगदान के कारण उपजी हीन भावना से, संघ अब धीरे-धीरे उबर रहा है और इसी के चलते वह तिरंगे के प्रति सम्मान का भाव दर्शाने लगा है। 

अपने बयान में श्री शर्मा ने आगे इस बात पर संतोष व्यक्त किया , कि तिरंगे के सम्मान के लिए चलाए गए उसके सकारात्मक आंदोलनों का प्रभाव, अब उन विचारधाराओं पर भी पड़ने लगा है, जो पहले तिरंगे की अवधारणा के ही खिलाफ थीं। निश्चित ही किसी भी शक्तिशाली राष्ट्र के लिए यह महत्वपूर्ण है कि मतभिन्नताओं के बावजूद, सभी विचारधाराएं अपने गौरवशाली अतीत, उसके महान नायकों और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा और सम्मान का भाव कायम रखें।

अपने बयान के अंत में श्री शर्मा ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि संघ अभी भी अपने मूल वैचारिक "सिद्धांतों" से बाहर नहीं आ पा रहा है, जिसके चलते संघ और भाजपा मिलकर, न केवल लोकतांत्रिक व संवैधानिक व्यवस्थाओं को खंडित करते हुए, भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं बल्कि वे संवैधानिक नियम-कानूनों का भी खुला उल्लंघन कर रहे हैं। यदि संघ की नीयत साफ है तो उसे अपने गुप्त और छद्म स्वरूप से बाहर आकर, शीघ्र ही अपना विधिवत पंजीयन कराना चाहिए, जिससे वह देश के कानून और संवैधानिक संस्थाओं के दायरे में आकर, उनके प्रति जवाबदेह हो सके। अगर संघ ऐसा नहीं करता है तो उसकी वास्तविक नीयत और इरादों पर गंभीर संदेह सदैव बरकरार रहेंगा।
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