लेखिका
या सुबह का उजाला हो ,
चाहे लड़खड़ाते हुए ,
चाहे किसी ने संभाला हो ,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
किसी ने हमसे बताया था,
कि जिंदगी भी एक सफर हैं ,
राहगीर गुजर जाते है,
पर राहे अमर हैं,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
गुमनाम सी मंजिले हो ,
या पहचान सी राहे हो ,
साथ किसी अनजाने का हो,
या अपनों की बाहें हो,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
कुछ लोग न जाने जीवन से ,
कैसे निराश हो जाते हैं ,
एक राह रुक जाने पर,
क्यूँ हताश हो जाते हैं ,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
जीवन ,नाम विश्वास का,
उम्मीदों का आस का है ,
जिसमे कभी हार न माने ,
ऐसे अबाधित प्रयास का है ,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
संपादक
बस यूँ ही सफर'
रात का अँधेरा हो ,या सुबह का उजाला हो ,
चाहे लड़खड़ाते हुए ,
चाहे किसी ने संभाला हो ,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
किसी ने हमसे बताया था,
कि जिंदगी भी एक सफर हैं ,
राहगीर गुजर जाते है,
पर राहे अमर हैं,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
गुमनाम सी मंजिले हो ,
या पहचान सी राहे हो ,
साथ किसी अनजाने का हो,
या अपनों की बाहें हो,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
कुछ लोग न जाने जीवन से ,
कैसे निराश हो जाते हैं ,
एक राह रुक जाने पर,
क्यूँ हताश हो जाते हैं ,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
जीवन ,नाम विश्वास का,
उम्मीदों का आस का है ,
जिसमे कभी हार न माने ,
ऐसे अबाधित प्रयास का है ,
बस यूँ ही सफर चलता रहे !
शोभा खरेनई दिल्ली
-----------------परिचय
शोभा खरे दिल्ली निवासी हैं। उच्च शिक्षित हैं और कुछ समय तक अध्यापन से जुड़ी रही।वर्तमान में साहित्य सेवा में रत हैं। आपकी कविताएं विगत लंबे समय से प्रकाशित हो रही हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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