लेखिका
भैया कैसे धरु में धीर ?
पल-पल अँखियों से बहे नीर l
अब के रक्षाबंधन न आ सकूँगी पीहर ,
कोरोना महामारी ने जकड़ लिया है शहर l
भैया आप भी तो न आ सकोगे ,
कलाई पर राखी न बँधवा सकोगे l
मैं किसकी कलाई पर राखी सजाऊँगी ?
अपनी मनुहार किससे मनवाऊँगी ?
राखी तो आप तक पहुँच जाएगी ,
लेकिन भावनाएँ खाली रह जाएँगी l
वो जीवंतता कहाँ से आएगी ?
जो वक्त ने सिखाई है l
भैया ख्वाहिश यही है मेरी ,
जल्द ख़त्म हो यह बीमारी l
इष्ट-देव के चरणों में ,
अर्पित कर यह राखी
दुआ माँगती हूँ ,
तुम्हारी लम्बी उम्र की भाई l
भैया कैसे धरु में धीर ?
पल-पल अँखियों से बहे नीर l
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ख्वाहिश
भैया कैसे धरु में धीर ?
पल-पल अँखियों से बहे नीर l
अब के रक्षाबंधन न आ सकूँगी पीहर ,
कोरोना महामारी ने जकड़ लिया है शहर l
भैया आप भी तो न आ सकोगे ,
कलाई पर राखी न बँधवा सकोगे l
मैं किसकी कलाई पर राखी सजाऊँगी ?
अपनी मनुहार किससे मनवाऊँगी ?
राखी तो आप तक पहुँच जाएगी ,
लेकिन भावनाएँ खाली रह जाएँगी l
वो जीवंतता कहाँ से आएगी ?
जो वक्त ने सिखाई है l
भैया ख्वाहिश यही है मेरी ,
जल्द ख़त्म हो यह बीमारी l
इष्ट-देव के चरणों में ,
अर्पित कर यह राखी
दुआ माँगती हूँ ,
तुम्हारी लम्बी उम्र की भाई l
भैया कैसे धरु में धीर ?
पल-पल अँखियों से बहे नीर l
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