छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना,
राम मंदिर का भूमिपूजन
और गोधन न्याय योजना का संयोग
आज अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से हुआ। इस भूमिपूजन के भव्य और दिव्य आयोजन में देश भर की नदियों का जल, विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी और अन्य सामग्री अयोध्या पहुँचाई गईं। यानि पूरे देश की सहभागिता राम मंदिर के भूमिपूजन में रही। वहीं छत्तीसगढ़ की सहभागिता, सहयोग और श्रद्धा भी भरपूर रही। यह संयोग ही हैं कि जिस वर्ष देश के सबसे भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है उसी वर्ष छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना प्रारंभ हुई है। भगवान श्रीराम का अलगा अवतार भगवान श्रीकृष्ण गायों से बहुत प्रेम करते थे। उनके प्रेम और आस्था के फलस्वरूप ही सदियों से हमारी संस्कृति और भक्ति में गाय को माता माना गया।
हमारी सनातन परंपरा में गाय में 36 हजार देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। लेकिन समय परिवर्तन के इस चक्र में आज देश भर में पशुधन (गाय) की दयनीय स्थिति हो गई है। आज पशुधन लोगों को बोझ लगने लगा। पशुओं से होते अलगाव को पुन: स्थापित करने 20 जुलाई 2020 से ऐतिहासिक गोधन न्याय योजना प्रारंभ की है। इस योजना के अंतर्गत सरकार गांव-गांव से घर-घर से 2 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी कर रही है। इसी तरह आज 5 अगस्त को प्रदेश के पशुपालकों के खातों में 1 करोड़ 65 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राज्य में कुल 4140 गोठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 02 हजार 711 क्विंटलगोबर का विक्रय किया गया। इस योजना का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर के पशुपालकों तक पहुँचाया जा रहा है, जिसमें 38 प्रतिशत महिला हितग्राही 48 प्रतिशत अन्य पिड़छा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही हैं। गोबर खरीदी का अगला भुगतान 15 अगस्त को किया जाऐगा।
निश्चित रूप से भगवान श्रीराम की श्रद्धा और आस्था में प्रदेश की सहभागिता का अव्वल माना जाऐगा। हमारी संस्कृति और विश्वास में पशुओं का महत्वपूर्ण स्थान है।
निश्चित रूप से कहा जा सकता है भूपेश सरकार की पहल और प्रयास की सराहना होनी चाहिए। जिन्होंने देश में घटते पशुओं और घटती जैविक खेती को बढ़ावा देने में ऐतिहासिक योजना प्रारंभ की है। इस योजना से एक और जहां पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा वहीं पुशओं के प्रति लोगों की मानसिकता भी बदलेगी।
मैं भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना करती हूँ, जिन्होंने एक महत्वाकांक्षी और उपयोगी योजना से पशुधन को बढ़ावा देने में सहयोग दिया है।
राम मंदिर का भूमिपूजन
और गोधन न्याय योजना का संयोग
विजया पाठक
एडिटर, जगत विज़नआज अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से हुआ। इस भूमिपूजन के भव्य और दिव्य आयोजन में देश भर की नदियों का जल, विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी और अन्य सामग्री अयोध्या पहुँचाई गईं। यानि पूरे देश की सहभागिता राम मंदिर के भूमिपूजन में रही। वहीं छत्तीसगढ़ की सहभागिता, सहयोग और श्रद्धा भी भरपूर रही। यह संयोग ही हैं कि जिस वर्ष देश के सबसे भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है उसी वर्ष छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना प्रारंभ हुई है। भगवान श्रीराम का अलगा अवतार भगवान श्रीकृष्ण गायों से बहुत प्रेम करते थे। उनके प्रेम और आस्था के फलस्वरूप ही सदियों से हमारी संस्कृति और भक्ति में गाय को माता माना गया।
हमारी सनातन परंपरा में गाय में 36 हजार देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। लेकिन समय परिवर्तन के इस चक्र में आज देश भर में पशुधन (गाय) की दयनीय स्थिति हो गई है। आज पशुधन लोगों को बोझ लगने लगा। पशुओं से होते अलगाव को पुन: स्थापित करने 20 जुलाई 2020 से ऐतिहासिक गोधन न्याय योजना प्रारंभ की है। इस योजना के अंतर्गत सरकार गांव-गांव से घर-घर से 2 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी कर रही है। इसी तरह आज 5 अगस्त को प्रदेश के पशुपालकों के खातों में 1 करोड़ 65 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राज्य में कुल 4140 गोठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 02 हजार 711 क्विंटलगोबर का विक्रय किया गया। इस योजना का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर के पशुपालकों तक पहुँचाया जा रहा है, जिसमें 38 प्रतिशत महिला हितग्राही 48 प्रतिशत अन्य पिड़छा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही हैं। गोबर खरीदी का अगला भुगतान 15 अगस्त को किया जाऐगा।
निश्चित रूप से भगवान श्रीराम की श्रद्धा और आस्था में प्रदेश की सहभागिता का अव्वल माना जाऐगा। हमारी संस्कृति और विश्वास में पशुओं का महत्वपूर्ण स्थान है।
निश्चित रूप से कहा जा सकता है भूपेश सरकार की पहल और प्रयास की सराहना होनी चाहिए। जिन्होंने देश में घटते पशुओं और घटती जैविक खेती को बढ़ावा देने में ऐतिहासिक योजना प्रारंभ की है। इस योजना से एक और जहां पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा वहीं पुशओं के प्रति लोगों की मानसिकता भी बदलेगी।
मैं भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना करती हूँ, जिन्होंने एक महत्वाकांक्षी और उपयोगी योजना से पशुधन को बढ़ावा देने में सहयोग दिया है।


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