आज दिन मे मना मना दशहरा और रात मे मनेगी दीपावली 

राजेश शर्मा 

5 अगस्त, सन् 2020 का दिन भारत के इतिहास मे अविस्मरणीय है। हालांकि 25 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनना था और और 15 नवंबर को दीपावली लेकिन पांच अगस्त को दोनों ही त्योहार एकसाथ मन गए क्योंकि अवसर था, रामजन्म भूमि के न्याय का। न्याय मिलता है चाहे वह सदियों बाद मिले_जिन आततायी ने मंदिर तोड़ा था उनकी रुह जहन्नुम मे भटक रही है। खुदा ने भी जन्नत नहीं बख्शी बैचारे को! 
इधर समूचा राष्ट्र केवल "राम" के लिए"मरा"दिखाई देता रहा,लोगों ने ऐसे 'कुर्बानियां' दी जैसे.......ईद मन गई।
आगामी 25 अक्टूबर को दशहरा पर्व है ,यह पर्व अधर्म से धर्म की जीत का प्रतीक है। परोक्ष रुप से कहें तो आज सदियों पश्चात अधर्म से धर्म की जीत हुई है।
मित्र प्रकाशन (सरिता,मुक्ता,केरेवान...आदि) के प्रकाशकों को मेने कई खत लिखे थे जिसमे यही उल्लेख था कि आप मिट जाओगे लेकिन सनातन धर्म नहीं।
घुस्से मे प्रकाशक ने तो दो पुस्तक पोस्ट कर दीं जो आज भी मेरे पास संग्रहित हैं।
मैं आज मित्र प्रकाशन दिल्ली से सवाल करता हूँ कि....बोलिए क्या सही!!

बता दें कि 25 अक्टूबर को दशहरा हैं जो इसीलिए मनाया जाता है कि भगवान श्रीराम ने घमंड को नेस्तनाबूत कर खुद मनुष्य को आजादी के साथ जीने का संदेश दिया था  और बताया था कि जो अधर्म के रास्ते पर होगा उसका यही हर्ष होगा।

"राम रिटर्न टू अयोध्या फ्राम दिस डे" यानि दीपावली....

15 नवंबर सन् 2020

हकीकत मे आज रात दीपावली ही है क्योंकि भगवान श्रीराम आज वापस लोट आए हैं। लेकिन श्रेय की राजनीति फिर भी जान खा रही है। हमने देखा श्रेय की राजनीति को_हमने लुटते देखा सिद्धांतों को। आज सिर्फ राम नाम की लूट थी__लूट सके तो लूट.....
अंतकाल पछताएगा वोटर जाएंगे छूट...  
मुद्दा राजनीति से अलग हटकर है। मैं पूरे मीडिया से इसीलिए मुखातिब रहा कि अपने बिरादरी वालों से भी तो मिलकर रहूं। पूरे कर्मचारी लगे थे, ड्यूटी पर तैनात खड़े थे क्योंकि "पापी पेट का सवाल था"।
सबकुछ तरकीब से चला। कुछ मिले कुछ जुदा हो गए। हाशिये पर अब अधर्म है। हकीकत सदियों के बाद सामने है।------(कोई शक?)


और एक हकीकत यह भी...

दम मारो दम.... मिट जाए गम... बोलो सुबह शाम.... हरे कृष्णा हरे राम.....।
 1970 में एक फिल्म आई थी... जिसका ये गाना है.. गाने में आगे के बोल हैं... दुनियाँ ने हमको दिया क्या... दुनियाँ से हमने लिया किया...!!
इस गीत का जिक्र इसलिए कि.... वो तो नशेले थे... जो दुनियाँ को अपनी नजरों से देखते थे... लेकिन जिनको दुनियाँ से बहुत कुछ मिला.... उनने उन्हें क्या दिया....। 
यही दर्द है... प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का.... जो राम मंदिर निर्माण को जन आंदोलन बनाने में.. लाल कृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, अशोक सिंघल, ऋतंभरा आदि के साथ अग्रिम पंक्ति की नेता थी.....। उनने कहा कि... राम भाजपा की बपोती नहीं है.... अहंकार से अंत आता है.... राम अनंत हैं....। इस कसक की वजह थी.... उक्त नेताओं को.... जो जीवित होने के बाद भी.. आज राम जन्म भूमि मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर बुलाये ही नहीं गए...। 
भाजपा के ही एक सांसद.... और राम जन्म भूमि आंदोलन से जुड़े... सुब्रमण्यम स्वामी ने भी... इस आयोजन को लेकर तीखा हमला किया है.... वह एक कदम आगे जाकर बताते हैं... कि राम जन्म भूमि मंदिर के ताले... 1985 में राजीव गांधी ने खुलवाये... संसद में वादा भी किया कि भव्य राम मंदिर.. अयोध्या में बनाया जाएगा...। उसी कड़ी में नरसिंहाराव ने राम मंदिर का शिलान्यास कराया.... और 72 एकड़ जमीन को एक अध्यादेश के जरिए.... सरकारी घोषित की...। उन्होंने भी उमा भारती की तरह... सभी नेताओं का नाम लेकर कहा कि... इन सब की सक्रिय भूमिका है... राममंदिर को आज के हालात तक पहुंचाने में... और इनको ही आमंत्रित नहीं किया गया....। पीएम नरेंद्र मोदी की तो कोई भूमिका ही नहीं... वह किस हैसियत से आमंत्रित किये गए हैं.... मंदिर का सारा काम तो कोर्ट ने किया है....। अगर राष्ट्र प्रमुख को बुलाना था तो... महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बुलाना था....। दोनो नेताओं के तेवरों से एक बात तो तय है कि... भाजपा में अंतरकलह जोर पकड़ रहा है... जो धीरे से शायद यही कह रहा हो.... जो हरे राम हरे कृष्ण फिल्म के ऊपर वाले गीत के काउंटर में... आनंद बख्शी से देव आनंद ने लिखवाया था..... 
देखो ओ दीवानों ऐसा काम न करो 

राम का नाम बदनाम न करो.......

राजेश शर्मा

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