बाबा सत्यनारायण मौर्य, जिन्होंने दिया था नारा- रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे..
ढांचा टूटने के बाद खुले में विराजे रामलला तो बाबा मौर्य के बैनर के कपड़े से बना था अस्थाई मंदिर,
सत्यनारायण मौर्य अब इंदौर में रह रहे। 1992 में अयोध्या की दीवारों पर ओजस्वी नारे लिखे। छह दिसंबर को संभाली थी मंच संचालन की जिम्मेदारी,

अयोध्या में पांच अगस्त को भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के भूमि पूजन की घोषणा के साथ ही देशभर में अयोध्या आंदोलन से जुड़ी यादें भी ताजा होने लगी हैं। वर्ष 1990 और 1992 की कारसेवा में भाग लेने वाले कारसेवकों ने न केवल असहनीय कष्ट सहे अपितु दर्जनों लोगों ने अपने प्राण भी न्यौछावर कर दिए।
1992 के कारसेवा आंदोलन में विवादित ढांचा गिराने के बाद जब रामलला को पुन: ढांचा स्थल पर विराजित किया गया था, तब वहां मौजूद इंदौर के चित्रकार ने अपने पास मौजूद बैनर के कपड़े की सहायता से रामलला के आसपास अस्थाई मंदिर जैसा बना दिया था।
ये शख्सियत हैं बाबा सत्यनारायण मौर्य। मूलत: राजगढ़ जिले के निवासी बाबा मौर्य वर्षों से इतिहास के अनछुए पहलुओं को कैनवास पर उकेरकर उन्हें प्रदर्शनियों के माध्यम से देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाने के अभियान में जुटे हैं। देश के अलग-अलग स्थानों पर रहने के बाद बाबा 10 वर्षों से इंदौर में ही रमे हैं। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी यादें साझा कीं।
हर रामभक्त की जुबान पर चढ़ गया
यह नारा निकला था बजरंग दल के एक शिविर में। उज्जैन में 1986 में बजरंग दल के शिविर में पहली बार बाबा सत्यनारायण मौर्य ने यह नारा दिया जो बाद में हर रामभक्त की जुबान पर चढ़ गया। बाबा सत्यनारायण मौर्य ने बताया कि 1986 में वह मध्यप्रदेश के राजगढ़ से एम कॉम की पढ़ाई कर रहे थे। तब उज्जैन में बजरंग दल का शिविर लगा। मौर्य ने बताया कि मैं भी उस शिविर में शामिल था। शिविर में शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। उसी कार्यक्रम में मैंने राम जन्मभूमि को लेकर यह नारा पहली बार दिया। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।
रामजन्मभूमि आंदोलन का प्रतीक बन गया नारा
उन्होंने कहा कि इसके बाद यह नारा अलग-अलग जगह स्वयंसेवकों ने लगाया और फिर यह रामजन्मभूमि आंदोलन का एक अहम नारा बन गया।
55 साल के बाबा मौर्य ने कहा कि 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या के कार्यक्रम में सबसे पहले मंच संचालन उन्होंने ही किया। वह तब आंदोलन के प्रचार प्रमुख थे और पूरे अयोध्या में उन्होंने वॉल राइटिंग की जिसमें श्रीराम और हनुमान के चित्रों के साथ नारे भी शामिल थे। राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर उनके गाने की कैसेट भी तब खूब चली थी।
वे बताते हैं: मैं छात्र जीवन से ही राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ गया था। उस वक्त उज्जैन में रहकर पढ़ाई कर रहा था। साथ में दीवारों पर चित्र बनाने के साथ कविताएं भी लिखता था। इसी दौरान मन हुआ तो अयोध्या जा पहुंचा। वहां दीवार पर नारे लिखने के साथ पेटिंग भी बनाई। इसी दौरान विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल ने दीवारों पर नारे और छंद लिखते देख पूछा ये किसने लिखे हैं? तब मैंने उन्हें अपने लिखे कुछ छंद बताए तो उन्होंने कहा कि दिल्ली जाकर ऑडियो कैसेट के लिए कुछ छंद रिकॉर्ड करवा लो। इसके बाद दिल्ली पहुंचकर रिकॉर्डिंग की। कुछ ही दिनों में कैसेट देशभर में पहुंच गई।
1992 में जब राम जन्मभूमि आंदोलन दोबारा शुरू हुआ तो फिर अयोध्या पहुंचा। इस बार अयोध्या की दीवारों पर भगवान राम की सुंदर झांकी उकेरी और नारे भी लिखे। तब तक हजारों कारसेवक अयोध्या पहुंच चुके थे। चार दिसंबर को कोर्ट का फैसला आया कि विवादित स्थल पर कोई निर्माण नहीं होगा। लेकिन छह दिसंबर को वहां जुटे लोग ढांचा गिराने के लिए चल पड़े। आयोजन स्थल पर लगे मंच पर विहिप के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ सभी बड़े नेता मौजूद थे। मैं संचालन कर रहा था। दोपहर 12 बजे कारसेवकों ने राम जन्मभूमि स्थल पर प्रवेश किया और विवादित ढांचे को गिराना शुरू कर दिया। शाम पांच बजते-बजते ढांचा जमींदोज हो चुका था। मलबे के बीच एक ऊंचे स्थान पर रामलला को दोबारा विराजित कर दिया गया।
बैनर बनाने का कपड़ा ही था, उसी से रामलला का अस्थाई मंदिर बन गया
बाबा मौर्य कहते हैं: जब रामलला को चबूतरे पर रखा गया तो आसपास से खुला था। इसी दौरान विचार आया कि बैनर बनाने के कपड़े से एक अस्थाई मंदिर बना दिया जाए। मैंने साथ खड़े वासुदेवाचार्य और दिल्ली के पूर्व सांसद बीएल शर्मा प्रेम से कहा तो उन्होंने तुरंत कपड़ा लाने के लिए कहा। कपड़ा लाकर हाथों-हाथ रामलला के आसपास कपड़े की ओट बना दी गई।
अयोध्या में लगेगी प्रदर्शनी
उन्होंने बताया कि अयोध्या में मंदिर परिसर में अयोध्या शोध संस्थान की तरफ से प्रदर्शनी लगाने की भी तैयारी है। पहले यह प्रदर्शनी 5 अगस्त को लगनी थी लेकिन सुरक्षा कारणों से अब बाद में लगेगी। प्रदर्शनी चार भागों में होगी जिसका एक हिस्सा 'जन्मभूमि का इतिहासÓ विषय पर प्रदर्शनी बाबा मौर्य ही लगाएंगे। इसमें चित्रों और पेंटिंग के जरिए इतिहास बताया जाएगा। इसके अलावा राम की विश्व यात्रा, पुरातात्विक प्रमाण और राम मंदिर मॉडल की प्रदर्शनी लगेगी।
ढांचा टूटने के बाद खुले में विराजे रामलला तो बाबा मौर्य के बैनर के कपड़े से बना था अस्थाई मंदिर,
सत्यनारायण मौर्य अब इंदौर में रह रहे। 1992 में अयोध्या की दीवारों पर ओजस्वी नारे लिखे। छह दिसंबर को संभाली थी मंच संचालन की जिम्मेदारी,
डॉ. अजय सिंह पटेल,सीहोर
बुधवार को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी, राज्यपाल आदि के द्वारा पूर्ण विधि-विधान से अयोध्या में पूर्ण विधि-विधान से भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का भूमि पूजन किया। भूमि पूजन को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। सभी देशवासियों ने भगवान श्रीराम के मंदिर के भूमि पूजन का समर्थन किया और देश के कोने-कोने में जमकर आतिशबाजी और मंदिरों और घर-घर में दीप प्रज्जवलित हुए।
अयोध्या में पांच अगस्त को भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के भूमि पूजन की घोषणा के साथ ही देशभर में अयोध्या आंदोलन से जुड़ी यादें भी ताजा होने लगी हैं। वर्ष 1990 और 1992 की कारसेवा में भाग लेने वाले कारसेवकों ने न केवल असहनीय कष्ट सहे अपितु दर्जनों लोगों ने अपने प्राण भी न्यौछावर कर दिए।
1992 के कारसेवा आंदोलन में विवादित ढांचा गिराने के बाद जब रामलला को पुन: ढांचा स्थल पर विराजित किया गया था, तब वहां मौजूद इंदौर के चित्रकार ने अपने पास मौजूद बैनर के कपड़े की सहायता से रामलला के आसपास अस्थाई मंदिर जैसा बना दिया था।
ये शख्सियत हैं बाबा सत्यनारायण मौर्य। मूलत: राजगढ़ जिले के निवासी बाबा मौर्य वर्षों से इतिहास के अनछुए पहलुओं को कैनवास पर उकेरकर उन्हें प्रदर्शनियों के माध्यम से देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाने के अभियान में जुटे हैं। देश के अलग-अलग स्थानों पर रहने के बाद बाबा 10 वर्षों से इंदौर में ही रमे हैं। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी यादें साझा कीं।
हर रामभक्त की जुबान पर चढ़ गया
यह नारा निकला था बजरंग दल के एक शिविर में। उज्जैन में 1986 में बजरंग दल के शिविर में पहली बार बाबा सत्यनारायण मौर्य ने यह नारा दिया जो बाद में हर रामभक्त की जुबान पर चढ़ गया। बाबा सत्यनारायण मौर्य ने बताया कि 1986 में वह मध्यप्रदेश के राजगढ़ से एम कॉम की पढ़ाई कर रहे थे। तब उज्जैन में बजरंग दल का शिविर लगा। मौर्य ने बताया कि मैं भी उस शिविर में शामिल था। शिविर में शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। उसी कार्यक्रम में मैंने राम जन्मभूमि को लेकर यह नारा पहली बार दिया। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।
रामजन्मभूमि आंदोलन का प्रतीक बन गया नारा
उन्होंने कहा कि इसके बाद यह नारा अलग-अलग जगह स्वयंसेवकों ने लगाया और फिर यह रामजन्मभूमि आंदोलन का एक अहम नारा बन गया।
55 साल के बाबा मौर्य ने कहा कि 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या के कार्यक्रम में सबसे पहले मंच संचालन उन्होंने ही किया। वह तब आंदोलन के प्रचार प्रमुख थे और पूरे अयोध्या में उन्होंने वॉल राइटिंग की जिसमें श्रीराम और हनुमान के चित्रों के साथ नारे भी शामिल थे। राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर उनके गाने की कैसेट भी तब खूब चली थी।
वे बताते हैं: मैं छात्र जीवन से ही राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ गया था। उस वक्त उज्जैन में रहकर पढ़ाई कर रहा था। साथ में दीवारों पर चित्र बनाने के साथ कविताएं भी लिखता था। इसी दौरान मन हुआ तो अयोध्या जा पहुंचा। वहां दीवार पर नारे लिखने के साथ पेटिंग भी बनाई। इसी दौरान विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल ने दीवारों पर नारे और छंद लिखते देख पूछा ये किसने लिखे हैं? तब मैंने उन्हें अपने लिखे कुछ छंद बताए तो उन्होंने कहा कि दिल्ली जाकर ऑडियो कैसेट के लिए कुछ छंद रिकॉर्ड करवा लो। इसके बाद दिल्ली पहुंचकर रिकॉर्डिंग की। कुछ ही दिनों में कैसेट देशभर में पहुंच गई।
1992 में जब राम जन्मभूमि आंदोलन दोबारा शुरू हुआ तो फिर अयोध्या पहुंचा। इस बार अयोध्या की दीवारों पर भगवान राम की सुंदर झांकी उकेरी और नारे भी लिखे। तब तक हजारों कारसेवक अयोध्या पहुंच चुके थे। चार दिसंबर को कोर्ट का फैसला आया कि विवादित स्थल पर कोई निर्माण नहीं होगा। लेकिन छह दिसंबर को वहां जुटे लोग ढांचा गिराने के लिए चल पड़े। आयोजन स्थल पर लगे मंच पर विहिप के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ सभी बड़े नेता मौजूद थे। मैं संचालन कर रहा था। दोपहर 12 बजे कारसेवकों ने राम जन्मभूमि स्थल पर प्रवेश किया और विवादित ढांचे को गिराना शुरू कर दिया। शाम पांच बजते-बजते ढांचा जमींदोज हो चुका था। मलबे के बीच एक ऊंचे स्थान पर रामलला को दोबारा विराजित कर दिया गया।
बैनर बनाने का कपड़ा ही था, उसी से रामलला का अस्थाई मंदिर बन गया
बाबा मौर्य कहते हैं: जब रामलला को चबूतरे पर रखा गया तो आसपास से खुला था। इसी दौरान विचार आया कि बैनर बनाने के कपड़े से एक अस्थाई मंदिर बना दिया जाए। मैंने साथ खड़े वासुदेवाचार्य और दिल्ली के पूर्व सांसद बीएल शर्मा प्रेम से कहा तो उन्होंने तुरंत कपड़ा लाने के लिए कहा। कपड़ा लाकर हाथों-हाथ रामलला के आसपास कपड़े की ओट बना दी गई।
अयोध्या में लगेगी प्रदर्शनी
उन्होंने बताया कि अयोध्या में मंदिर परिसर में अयोध्या शोध संस्थान की तरफ से प्रदर्शनी लगाने की भी तैयारी है। पहले यह प्रदर्शनी 5 अगस्त को लगनी थी लेकिन सुरक्षा कारणों से अब बाद में लगेगी। प्रदर्शनी चार भागों में होगी जिसका एक हिस्सा 'जन्मभूमि का इतिहासÓ विषय पर प्रदर्शनी बाबा मौर्य ही लगाएंगे। इसमें चित्रों और पेंटिंग के जरिए इतिहास बताया जाएगा। इसके अलावा राम की विश्व यात्रा, पुरातात्विक प्रमाण और राम मंदिर मॉडल की प्रदर्शनी लगेगी।


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