लेखिका 

 ग़ज़ल 

वीरानगी का पसरा नज़ारा है इन दिनों। 
हर शख़्स कोरोना से ही मारा है इन दिनों। 

जिसने हमेंशा सुन के हमें अनसुना किया,
मजबूरियाँ पड़ी तो पुकारा है इन दिनों। 

दुनिया को जो सुकून दे वो बात कर सकूँ, 
हर आदमी हालात का हारा है इन दिनों। 

या रब तू मुझको वक़्त के साँचे में ढ़ाल दे, 
तेरा ही मुश्किलात में सहारा है इन दिनों। 

कुछ इस कदर उनसे मुहब्बत हुई मुझे, 
हर एक ज़ुल्म उनका ग़वारा है इन दिनों।

खुल के भी कैद जो हुए अब लोग हर कहीं, 
कुछ हाल भी ऐसा ही हमारा है इन दिनों। 

रब की महर अनोखी ' प्रतिभा ' यकीन कर ,
उसकी पनाह में ही शिकारा है इन दिनों। 

डॉ प्रतिभा गर्ग ,  गुरुग्राम, हरियाणा

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परिचय

 डॉ प्रतिभा गर्ग 'प्रति', गुरुग्राम हरियाणा की निवासी हैं। आप शिक्षिका होने के साथ फ्रीलांस मेर्चंडाय्सर एवं लेखिका/ कवयित्री भी हैं। आप गीत, छंद, मुक्तक एवं गद्य लेखन के माध्यम से साहित्य सेवा कर रही हैं।आपकी मृगनयना, मंथन, नदी चैतन्य हिन्द धन्य, भारत की युवा कवि एवं कवयित्री, संगम स्मारिका,अमृत अभिरक्षा,जागो अभया, नीलाम्बरा सहित 15 साझा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक पत्र, पत्रिकाओं में आपकी रचनाओं का  प्रकाशन होता रहता है। आपने कुछ पत्र पत्रिकाओं का संपादन भी किया है। 
आपको अनेक मंचों से सम्मानित एवं पुरुस्कृत किया गया है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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