उमेश मिश्रा ने मारा जवाहर लाल दरियो का हक,
जनसंपर्क विभाग की मनमानी पर भूपेश बघेल की चुप्पी..
विजया पाठक
हम जानते हैं कि छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य राज्य है, यहां पर आदिवासियों की बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। इन आदिवासियों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिये राज्य में आदिवासियों को शासकीय नौकरियों में आरक्षण भी दिया जाता है, साथ ही लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शासकीय योजनाओं के माध्यम से भी लाभ पहुंचाया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पीछे भी यही मंशा जाहिर की गई थी कि समाज के इस वंचित और उपेक्षित वर्ग को ही सबसे पहले प्रदेश के संसाधनों और सेवाओं में हक मिलना चाहिए। प्रदेश का यही वर्ग है जिससे छत्तीसगढ़ की पहचान है, वजूद है। लेकिन प्रशासन में बैठे हुये ऐसे भी अधिकारी हैं जो नियमों कायदों को ताक में रखकर आदिवासियों के हक पर डाका मार रहे हैं। एक ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ संवाद में सामने आया है। 21 फरवरी, 2018 को जनसंपर्क विभाग द्वारा एक आदेश जारी किया जाता है, इस आदेश के अनुसार जवाहर लाल दरियो, अपर संचालक जनसंपर्क एवं अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी छत्तीसगढ़ संवाद की प्रतिनियुक्ति पर छत्तीसगढ़ संवाद को सौंपी गई। सेवाऐं तत्काल प्रभाव से जनसंपर्क विभाग को वापस लेकर उन्हें जनसंपर्क संचालनालय, इंद्रावती भवन में आगामी आदेश पर्यन्त अपर संचालक के पद पर पदस्थ किया गया। जवाहर लाल दरियो का समस्त कार्य प्रभार आगामी आदेश पर्यन्त छत्तीसगढ़ संवाद के निदेशक (सृजन) उमेश मिश्रा को तत्काल प्रभाव से सौंपा जाता है। यहां इस बात पर भी गौर करने की आवश्यकता है कि छत्तीसगढ़ संवाद में निदेशक के पद पर उमेश मिश्रा की जो प्रतिनियुक्ति हुई हैं उस पद के लिये जवाहर लाल दरियो की दावेदारी प्रबल थी, क्योंकि वह वर्षों से जनसंपर्क विभाग में कार्यरत् थे, जबकि इससे पहले उमेश मिश्रा विद्युत विभाग जबलपुर में कार्यरत् थे। आज भी उमेश मिश्रा की सैलरी विदयुत विभाग जबलपुर से निकलती है। हम अंदाजा लगा सकते हैं कि विद्युत मंडल का व्यक्ति जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभाग में कैसे अपनी सेवाऐं दे सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश में जब भूपेश बघेल की सरकार बनी। रूचिर गर्ग भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार बने। रूचिर गर्ग के कहने पर उमेश मिश्रा को जनसंपर्क में लाया गया, यहां पर सरासर दरियो का हक मारा गया है और उमेश मिश्रा की नियुक्ति नियम विरूद्ध और गैरकानूनी है। हम यहां पर एक बात का और जिक्र करना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ संवाद की नियमावली (वायलॉज) में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि छत्तीसगढ़ संवाद में विभिन्न पदों पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति जनसंपर्क विभाग से होना चाहिए। किसी बाहरी विभाग के व्यक्ति को जनसंपर्क विभाग में डेपुटेशन पर नही लाया जा सकता है। लेकिन उमेश मिश्रा को डेपुटेशन पर संवाद में लाया गया है। दिलचस्प है कि उमेश मिश्रा की संवाद में प्रतिनियुक्ति की नस्ती के दस्तावेज छत्तीसगढ़ संवाद में उपलब्ध नही हैं। निश्चित तौर पर छत्तीसगढ़ संवाद में एक काबिल आदिवासी अधिकारी का हक मारा गया है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ का जनसंपर्क विभाग रूचिर गर्ग, उमेश मिश्रा और पत्रकार विनोद वर्मा चला रहे हैं। विभाग की पूरी फंडिंग इन तीनों के कहने पर होती है। किस मीडिया संस्थान को विज्ञापन देना है और किसको विज्ञापन नहीं देना है यह सब ये तीनों ही तय करते हैं। छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जनसंपर्क जैसे विभाग पर सरकार का कुछ भी नियंत्रण नही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सब कुछ जानते हुए भी विभाग में हो रही मनमानी पर आंख मूंदे हुए हैं।


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