अष्टकोण पर्वत पर विराजी माँ शूलधारिणी


राजेश शर्मा,राजेश बनासिया           इछावर,भाऊँखेड़ी

तहसील मुख्यालय इछावर एवं ग्राम भाऊँखेड़ी से आठ किलोमीटर की दूरी पर पूर्व दिशा में है अष्टकोण पर्वत जो कि सूर्या बड़ली के नाम से प्रख्यात है, उक्त पर्वत की चोटी पर विराजमान है माँ शुलधारिणी। जहां इस समय भक्तों का दर्शनार्थ तांता लगा हुआ है। यहाँ मां शूलधारिणी दरबार पहुंचने के लिए भाऊँखेड़ी जोड़ से पूर्व दिशा में सूनी बड़ली है जहाँ पर माँ शूलधारिणी का जाग्रत स्थान है। बताया जाता है कि यहाँ जो स्थान है वह, तथा देवी प्रतिमा बहुत सिद्ध व चमत्कारिक है।

मां शूलधारिणी का उल्लेख दुर्गा चालीसा में भी आता है
इस सूनी बड़ली पर मां शूलधारिणी की खोज भाऊँखेड़ी दुर्गा मंदिर के पुजारी दिनेश दास बैरागी एवं ओम प्रकाश दुबे ने की उन्होंने बताया कि शास्त्र में उल्लेख के आधार पर हमने पूरी शूली बड़ली की खोज की तब हमें मां शूलधारणी की प्रतिमा पहाड़ की ऊंची चोटी से नीचे एक खाई में मिली उस समय हमने आसपास के ग्रामीणों के सहयोग से प्रतिमा को ऊपर विधि विधान से स्थापित किया यही बाजू में ही माता रानी के पद चिन्ह भी हैं तथा यहीं पर खोखल माता की प्रतिमा है।
बताया जाता है कि जब छोटे बच्चों को खासी हो जाती है व अस्पताल की दवा भी काम नहीं करती तब खोखल माता के पास आने व यहाँ की भभूत खाने से काली-सूखी खाँसी का रोग खत्म हो जाता है।
ग्रामीण बताते हैं कि हजारों लोग यहाँ गढ़े धन की फिराक में अपना समय नष्ट कर चुके हैं मगर यहाँ से अभी तक सभी को नाकामी ही हाथ लगी व ऐसे भी प्रमाण हैं कि जिसने भी यहाँ कुदृष्टि डाली वह बर्बाद भी हो गया।


 मैया के दरबार मे पहुंचने के लिए दुर्गम रास्तेशे सफर तय करना पड़ता है ग्राम बिछोली के लोगों का कहना है कि वन विभाग हमे यहाँ से रास्ता नहीं बनाने दे रहा जिससे हमें माता के मंदिर तक पानी के टैंकर ले जाने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है ग्रामीणों की मांग है कि यहाँ आने के लिए प्रशासन सुलभ मार्ग निर्मित कराए। गौरतलब है कि शूलधारिणी देवी दरबार के आसपास की भूमि वनविभाग के अंतर्गत आती है।
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