शिक्षा और समाज 
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                         लेखिका 

सत्य की शिक्षा मिली तो खिला था पुष्प धैर्य का 
इतिहास की ऊर्जा से समृद्ध हुआ राष्ट्र शौर्य का । 

बन मूर्तिकार जब गढ़ी थी निष्प्राण मृण्मय प्रतिमा 
भर रही थी दिव्यता,दीप्ति,संस्कार और द्युतिमा । 

एक कलश वो पूर्ण था जो उच्च नैतिक विचारों से 
समाज था वो तृप्त आधारों से संयुक्त परिवारों से । 

अपसंस्कृति की पवन चली विनाश की उड़ी धूल 
विस्मृत हुआ संवेग,नवयुवा,मनुष्यता गया भूल । 

अधीर हुआ पतन का महार्णव,उत्ताल हुईं लहरें 
ध्वंसाभिमुखी हुआ समाज आघात मिले गहरे । 

पाश्चात्य परंपरा पर ,त्याग स्वयं का आदर्शवाद
उन्मादित कैशोर्य ने , नष्ट किया है यथार्थवाद । 

की धृष्टता जो धर्म पर लाया हीन भाव की क्रांति 
कीट बन ये मानव शेष किया है मन की विश्रांति । 

परिणाम ये अशिक्षा का ,प्रायश्चित तो करना होगा 
आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर पुनः सिद्धांत भरना होगा 

एक मात्र उपयुक्त शिक्षा और एकता के ज्ञान से 
होगा पुनर्गठन समाज का पुनः , दर्शन विज्ञान से । 

....अनिमा दास ...

कटक , ओडिशा

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अनिमा दास जी पेशे से शिक्षक हैं। समय निकाल कर हिंदी साहित्य की सेवा उड़िया भाषी होने के साथ करती हैं। काव्य पुष्पांजलि और एक अन्य काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। काव्य में नूतन प्रयोग के लिए समाज आपका आभारी है। जिसमें सोनेट का प्रयोग अग्रणीय है। गद्य की विधा में जब आप समझाती है तो सुनने वाला हैरान हो जाता है आपकी बारीक नजर और समझ पर। एम पी मीडिया पॉइंट आभारी है आपका कि आपने अपनी रचना प्रकाशित करने को स्वीकृति दी।
संपादक- शैलेश तिवारी
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