यात्रा सफल करती पांच पत्थर की चढ़ोत्तरी
दौलतपुर गांव के आसपास घना जंगल और उसमे मानव जाति की बसाहट सदियों पुरानी है। इन्हीं जंगलों मे एक स्थान भेरु बाबा का भी है जहां आते-जाते लोग पांच पत्थर जरुर चढ़ाते हैं। इसके पीछे लोगों की मान्यता है कि बाबा प्रसन्न रहते हैं और उन्हीं की कृपा से यात्रा निर्विघ्न पूर्ण होती है।
क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार इछावर तहसील के दौलतपुर से सटे 25-30 गांवों के लोग देवास जिले के आदिवासी ग्राम खिवनी,निवारदी,पटरानी,लेंगापानी,मचवास आदि गांव पहुंचने के लिए जिस मार्ग से गुजरा करते थे उसी पैदल मार्ग पर भेरुबाबा का स्थान मौजूद है। बियावान जंगल मे सफर के दौरान लुटेरों और जंगली जानवरों से खतरा बना रहता था। लोग अपने प्राणों की रक्षा और सफल यात्रा की दुआ करते 5 पत्थर श्रद्धा के साथ चढ़ाते थे। यही परंपरा सदियों के बाद अब भी कायम है। हालांकि अब यह स्थान खिवनी अभ्यारण्य के अंतर्गत आता है।
बुज़ुर्ग बताते हैं कि बाबा को 5 पत्थर चढ़ाने की प्रथा अंधविश्वास नहीं, क्योंकि कुछ लोगों ने इस प्रथा को तोड़ने का प्रयास भी किया लेकिन वह जंगल मे या तो भटक गए या फिर जंगल मे हिंसक प्राणी मिलने के कारण यात्रा अधूरी छोड़ वापस लोट आए। सघन जंगल के बीच मौजूद भेरुबाबा के उक्त स्थान पर पत्थरों का ढेर लगा हुआ है। कुछ विशेष अवसरों पर लोग इन्हीं पत्थरों मे से उठाकर एक पत्थर साथ भी ले जाते हैं और भेरुबाबा के रुप मे मानकर उनकी पूजा करते हैं।
राजेश शर्मा
तहसील मुख्यालय इछावर से 23 और ग्राम दौलतपुर से करीब दो किलोमीटर दूर खिवनी अभ्यारण्य मे एक ऐसा भेरु बाबा का प्राचीन स्थान है जहां पत्थरों का ढेर लगा हुआ है। वह इसीलिए कि राहगीरों द्वारा उक्त स्थान पर 5 पत्थर चढ़ाए जाने की प्रथा आज भी कायम है।दौलतपुर गांव के आसपास घना जंगल और उसमे मानव जाति की बसाहट सदियों पुरानी है। इन्हीं जंगलों मे एक स्थान भेरु बाबा का भी है जहां आते-जाते लोग पांच पत्थर जरुर चढ़ाते हैं। इसके पीछे लोगों की मान्यता है कि बाबा प्रसन्न रहते हैं और उन्हीं की कृपा से यात्रा निर्विघ्न पूर्ण होती है।
क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार इछावर तहसील के दौलतपुर से सटे 25-30 गांवों के लोग देवास जिले के आदिवासी ग्राम खिवनी,निवारदी,पटरानी,लेंगापानी,मचवास आदि गांव पहुंचने के लिए जिस मार्ग से गुजरा करते थे उसी पैदल मार्ग पर भेरुबाबा का स्थान मौजूद है। बियावान जंगल मे सफर के दौरान लुटेरों और जंगली जानवरों से खतरा बना रहता था। लोग अपने प्राणों की रक्षा और सफल यात्रा की दुआ करते 5 पत्थर श्रद्धा के साथ चढ़ाते थे। यही परंपरा सदियों के बाद अब भी कायम है। हालांकि अब यह स्थान खिवनी अभ्यारण्य के अंतर्गत आता है।
बुज़ुर्ग बताते हैं कि बाबा को 5 पत्थर चढ़ाने की प्रथा अंधविश्वास नहीं, क्योंकि कुछ लोगों ने इस प्रथा को तोड़ने का प्रयास भी किया लेकिन वह जंगल मे या तो भटक गए या फिर जंगल मे हिंसक प्राणी मिलने के कारण यात्रा अधूरी छोड़ वापस लोट आए। सघन जंगल के बीच मौजूद भेरुबाबा के उक्त स्थान पर पत्थरों का ढेर लगा हुआ है। कुछ विशेष अवसरों पर लोग इन्हीं पत्थरों मे से उठाकर एक पत्थर साथ भी ले जाते हैं और भेरुबाबा के रुप मे मानकर उनकी पूजा करते हैं।


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