उठो... जागो... और जगाओ.. इस ज़हर से मुक्ति पाओ....
विद्यालय... शब्द है सरस्वती के उस मंदिर का.. जहाँ गढ़ा जाता है.. देश का भावी नागरिक..। .. और शिक्षक होता है वो.. सृजक.. जो तैयार करता है... राष्ट्र के श्रेष्ठ नागरिकों का.....। बात है हमारी शिक्षा प्रणाली की... जो इस समय परीक्षाओं के दौर से गुजरने की तैयारी में व्यस्त है..। शिक्षा की जैसी भी प्रणाली वर्तमान में हमें मिली है... हमारी सरकार ने हमें दी है....। और सरकारी तंत्र ही तय करता है कि देश का भविष्य गढ़ने वाले हाथों में कितनी कुशलता होनी चाहिए। इसमें कोई शक नही कि शिक्षक बनने के लिए जो मापदंड तय.. किए गए हैं.. वह उच्च कोटि के हैं..। ये अलग बात है कि तय मापदंडों को धता बता देने की जुर्रत करने वाले भी हमारे ही रहनुमा होते हैं..। इन रहनुमाओं में अधिकतर वो होते हैं जिन पर कई आपराधिक प्रकरण विचाराधीन हैं..। न्यायालय की धीमी प्रक्रिया... इन अपराधी किस्म के लोगों को आज़ादी देती है... देश में नियम और कानून वाली संस्थाओं में जनता का प्रतिनिधित्व करने की... सरकारी तंत्र के संचालन की.. और तन्त्र को संचालित करने वाले व्यक्तियों के चयन की भी....। क्या हम वहाँ आ गए जहाँ नैतिक मूल्य तिरोहित हो गए हैं... जिम्मेदारी का अहसास गायब है...?
.. ये सारे सवाल उस घटना की कोख से जन्में हैं... जो मध्यप्रदेश के सागर में घटित हुई है... जहाँ एक कंप्युटर शिक्षक ने.. छात्र छात्राओं और अभिभावक के व्हाट्स अप ग्रुप में पोर्न वीडियो वायरल कर दिया..? शिक्षक को निलंबन की कार्यवाही का सामना करना पड़ा है... आगे चलकर जाँच और उसके निर्णय के आधार पर कोई कार्यवाही भी होगी...। लेकिन सवाल सुरसा की तरह अपना मुख बढ़ाए हुए खडा है कि... पोर्न पर सर्जिकल स्ट्राइक क्यों नहीं? अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अनेक देश इसको अपने यहाँ प्रतिबंधित कर चुके हैं... लेकिन संस्कार भूमि और दुनिया को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले, विश्व गुरु बनने की राह पर चल रहे भारत देश में क्यों नहीं.. ये प्रतिबंधित की जाती हैं..। क्या देश के सदनों में देश के भविष्य के प्रति इतनी जागरुकता भी नहीं बची? माना कि यह वात्सायन का देश है.. लेकिन उनके ही समकालीन मार्कंडेय देश को दुर्गा सप्तशती देकर नारी के शक्ति रूप की पूजा के साथ संयम की गिरह भी लगा देते थे। आज संयम की गाँठ खुली हुई है... ऐसे में यौन अपराध पर अंकुश कैसे लगे? इस किस्म के अपराधी पुलिस और अदालतों के सामने कबूल कर रहे हैं... कि हमें ऐसे अपराध करने की प्रेरणा पोर्न साइट देख कर मिली है..। अब अपराधी ही नहीं शिक्षक भी उस से प्रेरित होने लगे हैं..। एक सर्वे ने यह भी उजागर किया है कि दुनियाँ में इस तरह की साइट देखने वालों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीय लोगों की है। उनमे से भी अधिकांश युवा हैं...। यह पंक्तियाँ शायद हमारे मन को कम आंदोलित करें लेकिन यह लाइन आपको झकझोर देगी.. कि वह युवा मन आपके परिवार का सदस्य भी हो सकता है...। उठो.. जागों.. और सरकार को जगाओ... पोर्न साइट पर बेन लगाओ...।

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