जबलपुर हाईकोर्ट: बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण के मामलों पर 27 फरवरी को अंतिम सुनवाई
- ओबीसी आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ होगा फैसला
जबलपुर 05 फरवरी,2020
एमपी मीडिया पाइंट
आज हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे सरकार की ओर से पैरवी करने जबलपुर पहुंचे थे. इस दौरान हाईकोर्ट ने बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण संबंधी तमाम याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के लिए रख दिया है. अब सभी याचिकाओं पर 27 फरवरी को अंतिम सुनवाई होगी. इस दौरान सरकार की ओर से एक बार फिर आरक्षण पर रोक हटाने की मांग की गई लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.
अंतिम सूची पर है हाईकोर्ट की रोक।
गौरतलब है कि 28 जनवरी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एमपी पीएससी परीक्षाओं में बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण पर अंतरिम आदेश देते हुए रोक लगा दी थी और ये निर्देश दिए थे कि एमपी पीएससी अपनी भर्ती प्रक्रिया जारी रख सकती है लेकिन अंतिम सूची हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही जारी की जाएगी. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि भर्ती प्रक्रिया पूर्व के निर्धारित 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की तर्ज पर ही की जाए. बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण को चुनौती देने वाली तमाम याचिकाओं में यही दलील दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी मामले में दिए गए न्याय दृष्टांत के तहत किसी भी कीमत पर एसटी एससी ओबीसी वर्ग को 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
'जातीय जनसंख्या के आधार पर नहीं दिया जा सकता आरक्षण'
मामले में सरकार ने मध्य प्रदेश के लिहाज से एसटी एससी और ओबीसी वर्ग की जनसंख्या को ध्यान में रखकर बढ़ा हुआ आरक्षण देने की दलील दी थी. इस दलील के खिलाफ याचिकाकर्ताओं की ओर से स्पष्ट किया गया कि जातीय जनसंख्या के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. बहरहाल बहस को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अब मामले पर अंतिम सुनवाई की तारीख तय कर दी है।
- ओबीसी आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ होगा फैसला
जबलपुर 05 फरवरी,2020
एमपी मीडिया पाइंट
आज हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे सरकार की ओर से पैरवी करने जबलपुर पहुंचे थे. इस दौरान हाईकोर्ट ने बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण संबंधी तमाम याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के लिए रख दिया है. अब सभी याचिकाओं पर 27 फरवरी को अंतिम सुनवाई होगी. इस दौरान सरकार की ओर से एक बार फिर आरक्षण पर रोक हटाने की मांग की गई लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.
अंतिम सूची पर है हाईकोर्ट की रोक।
गौरतलब है कि 28 जनवरी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एमपी पीएससी परीक्षाओं में बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण पर अंतरिम आदेश देते हुए रोक लगा दी थी और ये निर्देश दिए थे कि एमपी पीएससी अपनी भर्ती प्रक्रिया जारी रख सकती है लेकिन अंतिम सूची हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही जारी की जाएगी. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि भर्ती प्रक्रिया पूर्व के निर्धारित 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की तर्ज पर ही की जाए. बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण को चुनौती देने वाली तमाम याचिकाओं में यही दलील दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी मामले में दिए गए न्याय दृष्टांत के तहत किसी भी कीमत पर एसटी एससी ओबीसी वर्ग को 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
'जातीय जनसंख्या के आधार पर नहीं दिया जा सकता आरक्षण'
मामले में सरकार ने मध्य प्रदेश के लिहाज से एसटी एससी और ओबीसी वर्ग की जनसंख्या को ध्यान में रखकर बढ़ा हुआ आरक्षण देने की दलील दी थी. इस दलील के खिलाफ याचिकाकर्ताओं की ओर से स्पष्ट किया गया कि जातीय जनसंख्या के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. बहरहाल बहस को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अब मामले पर अंतिम सुनवाई की तारीख तय कर दी है।


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