16 मार्च को क्या होगा, सपने साकार या अपने नाकार!!जहन दिक्कत मे है क्योंकि वह होने जा रहा है जो कईयों की ख्वाहिश पर पानी फेर सकता है।
अध्यक्ष की ख्वाहिश लिए नेता वार्ड चुनाव लड़ेंगे लेकिन वार्ड ही आरक्षण की भेंट चढ़ गया तो फिर नेताजी क्या करेंगे।
महर्षि शांडिल्य ने अपने भक्ति सूत्र की शुरुआत की "ॐ अथतो भक्ति जिज्ञासा" - अब भक्ति की जिज्ञासा करें।
कब करें? जब कर्म,ज्ञान,श्रद्धा सब हो चुका उसके बाद और सबके बाद और सबसे ऊपर भक्ति की जिज्ञासा करें।
महर्षि शांडिल्य की तरह अब हम लोकतंत्र की जिज्ञासा करें। लोकतंत्र मे हम सबकुछ वही कर रहे हैं जो बिल्ली चूहे को मारने से पहले करती है।
16 मार्च को आष्टा,इछावर,कोठरी और जावर के वह आरक्षण होना है जो कहीं लोकतंत्र को कुछ बताने जा रहे हैं और दिलासा भी।
कहते हैं अब गिरने वाली गाज का भी स्वरुप बदल गया है। किस रुप मे किसपर गिर जाए। यही होगा 16 मार्च को...."राजनीति वैज्ञानिकों" के मुताबिक़ सौ प्रतिशत अरमानों पर गाज गिरने वाली है। अब बात यह अलग है कि किस-किसके अरमान चपेट मे आएं। और कौन उजड़े चमन की दास्तान बन जाए!
एक नगरपालिका और तीन नगरपरिषदों का दाव 16 मार्च पर निर्भर है यानि फिरसे रंग पंचमी किसकी मनती है और कौन भदरंगी होता है।
प्रजातांत्रिक मूल्यों के रक्षार्थ प्रकिया से गुजरना होता है लेकिन अब स्वार्थार्थ। लोकतंत्र के संरक्षक चिंता मे हैं कि क्या होगा 16 को


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