दिनेश शर्मा, आष्टा                             एमपी मीडिया पाइंट 


योगेश नागले मंडी सचिव आष्टा  
पूरा विश्व जहाँ कॅरोना जैसी महामारी से परेशान है ।और धीरे धीरे भारत मे भी इस वायरस से संक्रमित मरीजो की संख्या बढ़ती जा रही है जिसको लेकर पूरा शासन, प्रशासन बहुत परेशान होकर सजक भी है। रेलवे प्रशासन भी अपनी सुविधाओ ओर व्यवस्थाओ को लेकर रोजाना नए नए नियम लागू कर रहा है जिससे कि यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न भोगना पड़े ।

          योगेश नागले, मंडी सचिव आष्टा


स्वास्थ्य विभाग से मिल रहे निर्देशो के अनुसार शासन ने स्कूल, कालेज, आंगनवाड़ियों,  सहित टाकीज तक 31 मार्च तक बतौर एहतियात बंद करवा दिए ।इतना ही नही सुरक्षा की दृष्टि से प्रदेश सरकार ने होली का त्योहार पर जहाँ पैनी नजर रखी वही रंग पंचमी के दिन तो अनेकों जगह होने वाले रंग के विशाल  स्वरूप को निरस्त करने के निर्देश जारी कर दिए जिससे कि यह महामारी किसी भी प्रकार से पनप नही पाये ।   ओर इस महामारी की रोकथाम के लिए किए जाने वाले प्रयासों के लिए जिला कलेक्टर सहित पूरे जिले का प्रशासन सजग है ।किंतु--
पूरे जिले की कृषि उपज मंडिया पूरी तरह से खुली रहकर प्रशासन और शासन द्वारा इस महामारी की रोकथाम वाले सारे प्रयासो का जहाँ खुला मखोल उड़ा रही है । वही इस वायरस होने वाली संक्रमण वाली बीमारियों को खुला आमंत्रण दे रही है।
शासन  की मंशा अनुसार किसी भी जगह पर समूह के रूप में लोग एकत्रित न हो। पर मंडियों में इस समय रोजाना हजारो लोग समूह के रूप में इक्कठे हो रहे है । उदाहरण के लिए अगर आष्टा मंडी को ही देखा जा तो 16 मार्च को आष्टा मंडी में लगभग 25 हजार बोरो की कृषि उपजों की किसानी आवक थी , याने लगभग 7000 किसान जो कि आष्टा सहित अन्य आसपास की 8 तहसीलों से अपनी उपज बेचने आते है । इनके साथ मंडी परिसर में मजदूरी हम्माली का कार्य कर रहे लगभग 2000 मजदूर, ओर परिसर में किसानों की उपज खरीद रहे लगभग 500 व्यापारी ।पूरे दिन साथ रहकर समूह के रूप में एकत्रित हुए । क्या यहाँ महामारी का खतरा नही है ।यह विचारणीय है ।इस ओर प्रशासन को अविलंब धयान देना चाहिए । ओर कोई बड़ी घटना घटे,  इससे पहले प्रशासन को इस व्यवस्था पर रोक लगाना चाहिए । नही तो जरासी लापरवाही कोई बड़ा स्वरूप लेकर शहर के लोगो को  लिए बड़ा संकट पैदा कर देगा। ,शायद इसका अंदाजा अभी किसी को नही है ।क़योकि मंडियों में जहाँ सुदूर ग्रामीण छेत्रो व  दूर दूर से किसान उपज विक्रय करने आ  रहे है वही अन्य प्रांतों से कई बड़ी बड़ी एग्रीकल्चर कंपनियों के एम्प्लाइज भी मंडियों में कंपनियों के लिए उपजों की खरीदी करने या रहे है ऐसे में मंडिया व उसके परिसर में इक्कठे  होने वाले रोजाना हजारो की तादात में लोग कितने सुरक्षित है आज कह पाना बहुत मुश्किल है ।
यह आष्टा मंडी का या आष्टा का या शहर का  प्रश्न नही है, प्रदेश की लगभग 200 से अधिक मंडिया पूरी तरह से चालू होकर संचालित हो रही है । ऐसे में प्रदेश की जनता इस महामारी से कितनी सुरक्षित रह पाएगी या बच पाएगी भगवान ही जाने । 

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