लेखिका 

नौकरी की तलाश 


 गांव से निकल कर शहर की ओर जाने वाली सड़क पर वाहन का इंतजार कर रही हेमा बार बार सहम कर पीछे मुड़कर देख लेती कहीं कौई देख तो नहीं रहा । सामने से बस आते ही हेमा झट से बस में सवार में हो गई शहर में पहुंच कर सीधे रेलवे स्टेशन की ओर चल पड़ी घड़ी देखी तो ट्रेन का समय हो गया था प्लेटफार्म पर पहुंचने पर हड़बड़ी में जो डिब्बा सामने दिखाई दिया उसमें चढ़ गई सहेली के कहने पर घर छोड़ तो दिया उसे कहां जाना है क्या काम मिलेगा कुछ भी पता नहीं कहां रहेगी ये भी पता नहीं सोच सोच कर उसके माथे पर पसीने की बूंदें झलकने लगी उसने रुमाल से  अपना मुंह साफ किया और सामने की बर्थ पर बैठी महिला से कहा मैं जल्द बाजी में इस डिब्बे में चढ़ आई हूं अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चली जाऊंगी । 
 हेमा ने अपने  मन में घुमडते हुए सवाल को सामने की बर्थ पर बैठी महिला से कहा मैं इंदौर शहर में नौकरी की तलाश में जा रही हूं महिला गरिमा  उससे पूछा तुम्हारे पास पता है कम्पनी का जिसमें तुम्हें काम करना है ? 
नहीं मेरे पास कोई पता नहीं है ।
बिना जानकारी के कैसे निकल आई घर  से  हेमा से पूछा । 
आंटी में इतना जानती हूं मेरी सहेली वहां काम करती है ।

 हेमा आप  अपनी सहेली से पता करो फोन पर की‌ कौन सी कम्पनी है इंदौर शहर में कहां पर है सहेली को हेमा ने फोन मिलाया तो उसने जिस कम्पनी का नाम बताया तो महिला को इंदौर की थोड़ी बहुत जानकारी थी उसे डाउट हुआ उसने लड़की की मदद के लिए गरिमा  बोली मेरी एक दोस्त है मैं उससे पता करती हूं कह कर फोन मिलाया दोस्त से औपचारिक बातचीत कर के पूछा ट्रेंन में मेरे साथ एक लड़की मुसाफिर है और वो नौकरी की तलाश में निकली है कम्पनी का नाम मेडीकेप बतारही है । दोस्त ने कहा लेकिन ऐसी तो कोई कम्पनी नहीं है वहां तो एक कालेज है । सुनकर लड़की  के चेहरे पर हवाइयां उड़ गई आँखों में आंसू भर आए गरिमा  से बोली अब तो घर छोड़ कर निकल आई हूँ एक बार जाकर सच्चाई का पता लगाना ही  होगा  । तब तक अगला स्टाप आने पर लड़की रिजर्वेशन कम्पार्टमेंट से उतरकर  जनरल डब्बे की ओर बढ़ गई गरिमा उसे जाते हुए देखती रही  एक अन्य  मुसाफ़िर जो उसकी बातें सुन रहे थे बोले अल्ल्लाह इस लड़की की हिफाजत करना ..... आमीन

 -अर्विना गहलोत

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परिचय 

अर्विना गहलोत.... इलाहाबाद उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। एम एस सी वनस्पति विज्ञान  जीवाजी यूनिवर्सिटी , ग्वालियर से किया है और वैद्य विशारद इलाहाबाद से किया है। स्वतन्त्र लेखन कर साहित्य की सेवा कर रही हैं। लगभग एक दर्जन से ज्यादा लघु कथा, कहानी और काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।  विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों से और यू ट्यूब पर भी आपकी रचनाओं का प्रसारण होता रहा है। आपको साहित्य के अनेक मंच से सम्मानित भी किया गया है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
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समीक्षा 

नौकरी की तलाश...... इस कथानक में लेखिका ने एक लड़की के माध्यम से युवा पीढी की रोजगार पाने की चाह का ऐसा ताना बाना बुना है कि जिसमें युवा मन हानि लाभ का आगा पीछा सोचे वगैर झूठ या चीटिंग में फंसने को बेकरार नजर आता है...। युवा के इस पागलपन भरे जुनून का फायदा समाज का वह तबका उठाता है.... जिसे असामाजिक कहना गलत न होगा....। नतीजे में युवतियां गलत रास्ते पर धकेल दी जाती हैं.... और जीवन नासूर बनकर उन्हें सालता रहता है....। ऐसे युवाओं को सीख देती कहानी में आखिर में.... अल्लाह इस लड़की की हिफाजत करना... आमीन....। वाक्य के साथ कथानक का समापन किया गया है.... मानों उन तमाम युवाओं के लिए दुआ मांगी गई है.... जो बिना सोचे विचारे.... रोजगार पाने की चाह में.... अपने जोश और जुनून को..... हुनर सहित दांव पर लगाकर न केवल खुद पछताते हैं... वरन अपने परिजनों को भी..... दुःखी कर जाते हैं...। आज के अविश्वसनीय दौर में..... आगाह करते कथानक को.... लिखने के लिए बधाई......। 
शैलेश तिवारी
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