शीतला सप्तमी पर महिलाओं ने पूजा कर ठंडे शीले का भोग लगाया, ओर इस तरह होली पर्व हुआ सम्पन्न
पांच दिवसीय होली महापर्व पर जहाँ पूरा शहर रंगों से सराबोर रहा ओर पूरे शहर में होली के हुरियारों की हुड़दंग रही ।वही होली पर्व का समापन शीतला सप्तमी पर महिलाओं द्वारा अनेको प्रकार की स्वादिष्ट खाद्य सामग्री, मिस्ठान, आदि जो की एक दिन पूर्व ही बना ली जाती है , से भोग लगा जर पूजन अर्चन किया गया ।
तत्पश्चात मन्दिर से लौटकर महिलाओ ने विधिवत होलिका का पूजन किया । आज अल सुबह से ही शहर के प्रमुख शीतला मंदिर पर महिलाओं का जमावड़ा हो गया।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महिलाओं ने शीतला माता के पूजन में उनके श्रंगार की वस्तुएं खाद्य सामग्रियो से बना कर माँ को अर्पण की ।
सुबह 4 बजे से ही महिलाये पूजन के लिए मंदिर में आने लग गयी थी ।
शीतला सप्तमी पर मां शीतला के ठंडी सामग्रियो से पूजन करने के बारे में यह किवदंती भी है कि महिलाएं मां का पूजन कर अपने परिवार को किसी भी बीमारिया न हो ।और पूरा परिवार स्वस्थ रहे यह कामना भी करती है ।
इस बार माता के पूजन में महिलाओं ने देश मे प्रवेश कर चुकी महामारी कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी व उसके वायरस से अपना देश व नगर सुरक्षित रहे इस बात को लेकर मन्नत मांगी।
बतादें कि इतिहास भी इस बात का प्रमाण देता है कि हिन्दू संप्रदाय के पास 18654 (अक्षरी अट्ठारह हजार छः सौ चोपन ) रीति रिवाज है और 159 तीज त्योहार हैं । ( एक सौ उनसाठ )
और धर्म में जो भी तीज -त्योहार है उनका वैज्ञानिक महत्व है और वह हमारे मनीषियों का शोधकार्य का दस्तावेज होता है ।
होली के सातवें दिन एक त्योहार आता है जिसे शीतला सप्तमी कहते हैं ।
इस दिन ठंडा भोजन ग्रहण किया जाता है । और इस दिन कोई भी गर्म वस्तु चाय, धूम्रपान तक वर्जित रहता है । महिलाएं शीतला सप्तमी से पहले रात में भोजन बना कर रख लेती है और अगले दिन शाम तक इसी भोजन को परोसती है । कुछ चतुर महिलाएं सुबह दोपहर और शाम का भोजन अलग अलग बना कर रख लेती है।
1968 में अमेरिकन रिपोर्टर में एक रिसर्च पेपर का उद्धरण था की जर्मनी में एक शोध संस्थान में शीतला सप्तमी के भोजन का एब्सट्रैक्ट निकाला गया तो स्माल पाक्स का वैक्सीन तैयार हो गया था । तमाम वैज्ञानिक आश्चर्यचकित थे भारतीय भोजन की उत्कृष्ट उपयोगिता के लिए ।
बाद में सन् 2002 में जब शीतलासप्तमी के भोजन के एक एक व्यंजन पर काम किया तो चार चीजें पकड़ में आई ।
चावल,गुड़,दही और रात भर भीगी हुई चने की दाल
शीतला सप्तमी के भोजन में मुख्यतः ये चीजें बनाई जाती है
पूरी , सब्जी, दाल , चावल , गुलगुले , भजिए
गुड़ या गन्ने के रस में पकाया हुआ चावल,दही और चने की भीगी हुई दाल जिसे पकाया नहीं जाता कच्ची खाई जाती है
...यदि होली के बाद सप्तमी तिथि को गुड़ में पका चावल एक कटोरी , दही एक कटोरी , तथा एक कटोरी चने की भीगी दाल ( तीनों को मिलाकर लगभग 250 ग्राम) इन तीनों को मिला कर खा लिया जाए और 24 घंटे तक आपके पेट में कोई भी गर्म पेय अथवा खाद्यपदार्थ न जाने पाए तो ऐसे विशिष्ट बैक्टीरिया का उत्पादन हो जाता है जो एंटीबायोटिक का काम करते हैं और पूरे साल भर आप सभी तरह के हानिकारक वायरस से सुरक्षित हो जाते है तथा किसी भी प्रकार का चर्मरोग, लीवर किडनी इन्फेक्शन नहीं होता । दावे से तो नहीं कहा जा सकता पर कोरोना वायरस से बचने का एक विकल्प शीतला सप्तमी भी हो सकता है ।इसलिए एक दिन ठंडा भोजन किया जा सकता है कोई अनर्थ नहीं हो जाएगा। तमाम रोगों पर अंकुश लगाने वाले माता शीतला के प्रसाद को घर-घर मे आज ग्रहण किया जा रहा है।
दिनेश शर्मा,आष्टाएमपी मीडिया पाइंट
पांच दिवसीय होली महापर्व पर जहाँ पूरा शहर रंगों से सराबोर रहा ओर पूरे शहर में होली के हुरियारों की हुड़दंग रही ।वही होली पर्व का समापन शीतला सप्तमी पर महिलाओं द्वारा अनेको प्रकार की स्वादिष्ट खाद्य सामग्री, मिस्ठान, आदि जो की एक दिन पूर्व ही बना ली जाती है , से भोग लगा जर पूजन अर्चन किया गया ।
तत्पश्चात मन्दिर से लौटकर महिलाओ ने विधिवत होलिका का पूजन किया । आज अल सुबह से ही शहर के प्रमुख शीतला मंदिर पर महिलाओं का जमावड़ा हो गया।
सुबह 4 बजे से ही महिलाये पूजन के लिए मंदिर में आने लग गयी थी ।
शीतला सप्तमी पर मां शीतला के ठंडी सामग्रियो से पूजन करने के बारे में यह किवदंती भी है कि महिलाएं मां का पूजन कर अपने परिवार को किसी भी बीमारिया न हो ।और पूरा परिवार स्वस्थ रहे यह कामना भी करती है ।
इस बार माता के पूजन में महिलाओं ने देश मे प्रवेश कर चुकी महामारी कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी व उसके वायरस से अपना देश व नगर सुरक्षित रहे इस बात को लेकर मन्नत मांगी।
और धर्म में जो भी तीज -त्योहार है उनका वैज्ञानिक महत्व है और वह हमारे मनीषियों का शोधकार्य का दस्तावेज होता है ।
होली के सातवें दिन एक त्योहार आता है जिसे शीतला सप्तमी कहते हैं ।
इस दिन ठंडा भोजन ग्रहण किया जाता है । और इस दिन कोई भी गर्म वस्तु चाय, धूम्रपान तक वर्जित रहता है । महिलाएं शीतला सप्तमी से पहले रात में भोजन बना कर रख लेती है और अगले दिन शाम तक इसी भोजन को परोसती है । कुछ चतुर महिलाएं सुबह दोपहर और शाम का भोजन अलग अलग बना कर रख लेती है।
1968 में अमेरिकन रिपोर्टर में एक रिसर्च पेपर का उद्धरण था की जर्मनी में एक शोध संस्थान में शीतला सप्तमी के भोजन का एब्सट्रैक्ट निकाला गया तो स्माल पाक्स का वैक्सीन तैयार हो गया था । तमाम वैज्ञानिक आश्चर्यचकित थे भारतीय भोजन की उत्कृष्ट उपयोगिता के लिए ।
बाद में सन् 2002 में जब शीतलासप्तमी के भोजन के एक एक व्यंजन पर काम किया तो चार चीजें पकड़ में आई ।
चावल,गुड़,दही और रात भर भीगी हुई चने की दाल
शीतला सप्तमी के भोजन में मुख्यतः ये चीजें बनाई जाती है
पूरी , सब्जी, दाल , चावल , गुलगुले , भजिए
गुड़ या गन्ने के रस में पकाया हुआ चावल,दही और चने की भीगी हुई दाल जिसे पकाया नहीं जाता कच्ची खाई जाती है
...यदि होली के बाद सप्तमी तिथि को गुड़ में पका चावल एक कटोरी , दही एक कटोरी , तथा एक कटोरी चने की भीगी दाल ( तीनों को मिलाकर लगभग 250 ग्राम) इन तीनों को मिला कर खा लिया जाए और 24 घंटे तक आपके पेट में कोई भी गर्म पेय अथवा खाद्यपदार्थ न जाने पाए तो ऐसे विशिष्ट बैक्टीरिया का उत्पादन हो जाता है जो एंटीबायोटिक का काम करते हैं और पूरे साल भर आप सभी तरह के हानिकारक वायरस से सुरक्षित हो जाते है तथा किसी भी प्रकार का चर्मरोग, लीवर किडनी इन्फेक्शन नहीं होता । दावे से तो नहीं कहा जा सकता पर कोरोना वायरस से बचने का एक विकल्प शीतला सप्तमी भी हो सकता है ।इसलिए एक दिन ठंडा भोजन किया जा सकता है कोई अनर्थ नहीं हो जाएगा। तमाम रोगों पर अंकुश लगाने वाले माता शीतला के प्रसाद को घर-घर मे आज ग्रहण किया जा रहा है।


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