लेखिक‍ा 

सभ्यता का अंत


 इस मानवीय जीवन के,
कंक्रीट के जंगल में 
पत्थर की सड़कों की भरमार है 
पर मन के खंड
हो चुके प्राकृतिक के प्रति संवेदनाओं से शून्य....

कमरे की खुली खिड़की 
और दिल के बंद दरवाजे, 
कर्कश आवाज़ों का मेला 
सब मिल कर भी 
हाथों से फिसलते वक़्त को 
थाम नहीं पा रहे   

कभी वायरस तो कभी धुएं का गुब्बार बनती,

ये!काली और खाली होती पृथ्वी

या हरी-भरी और  गूँजती पृथ्वी.... 

अपनी सभ्यता की पीड़ा, 
प्राचीन मान्यताओं की टूटन, 
उम्र की बोझिल हवा 
और दो पीढ़ियों में सोच के अंतर का अंतर भी 
दोनों ही, अपनी ही पहचान खो रहे  

फिर भी,
वक़्त की आँधी के आगे 
एक फीकी सी मुस्कुराहट 
जड़ों और शाखाओं का विद्रोह 
विघटन की प्रक्रिया 
हमारी ज़िंदगियों पर प्रहार ही तो है 
कहीं ये हमारी सभ्यता के अंत का संकेत तो नहीं ?

अंजु चौधरी (अनु)

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परिचय

अंजु चौधरी(अनु)...करनाल ,हरियाणा में निवास करती हैं।  स्वतंत्र लेखन में रुचि है और साहित्य की सेवा कर रही हैं। 

’’क्षितिजा’’ “ऐ री सखी’’ ठहरा हुआ समय” आदि काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। 
“मुझे मंजिलों की तलाश है”... नामक कहानी संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है। अनेक साझा संग्रह के साथ ही विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। 
 "कस्तूरी" "अरुणिमा" ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन’’ ‘’गूंज‘’ और ‘’100 कदम’’ ... आदि साँझा काव्य संग्रह का संपादन भी आपके द्वारा किया जा चुका है। 
 देश के विभिन्न राज्यों में अलग अलग बेनर द्वारा आपको सम्मानित किया गया है। 
एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है।
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