‘’वक्त है बदलाव का’’ नहीं वक्त है बदला लेने का,
कमलनाथ बना रहे बीजेपी विधायकों पर दवाब
जहां तक सरकार की इस कार्रवाई से एक बात स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है कि वह बीजेपी नेताओं को निशाना बनाकर दवाब में रखना चाहती है। सरकार का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से बीजेपी के अन्य विधायकों को भी संदेश जाएगा कि वह सरकार के खिलाफ आने में 100 बार सोचें। फिलहाल तो सिर्फ सरकार की मंशा इतनी भर है। यदि वाकई में कुछ गलत था तो पिछले 14 माह से सरकार क्या कर रही थी।
इस बीच संकेत मिले हैं कि घपलों और घोटालों में घिरे कुछ जनप्रतिनिधियों को घेरने के लिए गवाहों को सक्रिय किया जा रहा है। कुछ खास अफसरों को इसके लिए विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेक्स स्कैंडल से लेकर विभिन्न घोटालों में कुछ विधायकों को घेरने की भी रणनीति बन गई है। होली बाद इसमें बड़ी कार्रवाई के अनुमान लग रहे हैं। चूंकि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस दो सीटों पर अपनी बढ़त बनाना चाहती है, इसलिए भी वह साम, दाम, दंड और भेद का हर अस्त्र इस्तेमाल करने में जुटी है।
गौरतलब है कि इसके पहले कांग्रेस ने विधायक संजय पाठक पर विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया था। उन पर यह आरोप लगाया गया था कि विधायकों को पैसे का लालच देकर उन्होंने विधायकों को खरीदने की कोशिश की।
कमलनाथ बना रहे बीजेपी विधायकों पर दवाब
विजया पाठक
कमलनाथ सरकार मध्यप्रदेश में 'यह वक्त है बदलाव का' नारा लेकर आए थे। इस वक्त बदला ले रहे हैं। बदले की भावना से कमलनाथ सरकार बीजेपी नेताओं पर खोज-खोज कर कार्रवाईयां कर रही है। मध्यप्रदेश में सियासी भंवर में फंसी कांग्रेस अब पलटवार में भाजपा नेताओं के खिलाफ और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है। सियासत में हुई उठापटक के बीच कमलनाथ सरकार बदले के मूड में आ गई है। चुन-चुन कर बीजेपी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। आनन-फानन में कमलनाथ सरकार खिसिया रही है। आखिर ऐसी कार्रवाईयां कर सीएम कमलनाथ क्यान बताना चाहते हैं और कौनसी धौंस देकर विधायकों का अपनी ओर खींचना चाहते हैं। विधायक संजय पाठक ने अपनी जान का खतरा बताकर कमलनाथ सरकार को घेरने की कोशिश की तो उनके बांधवगढ़ के रिसोर्ट पर बुलडोजर चलवा दिया। इसके बाद वहां लगी फसल पर जेसीबी चलवा दी। संजय पाठक की निर्मला मिनरल्स के नाम से जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र में अगरिया और दुबियारा में आयरन की दो खदानें हैं। इनको भी सरकार ने सील कर दिया है। इन खदानों को जून 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जबलपुर कलेक्टर ने चालू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन 6 महीने में अभ्यावेदन के साथ ही सारे कागजात जमा करने की शर्त लगाई थी। यह होटल 12 साल पुराना है। इसे संजय पाठक के पिता ने बनवाया था। इस होटल में कई बार बीजेपी और कांग्रेस नेता भी रुक चुके हैं। पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह को भी सरकार ने निशाने पर लिया है। सागर में उनकी संपत्तियों की छानबीन शुरू कर दी गई है। सरकार ने एक और पूर्व मंत्री और भोपाल के विधायक विश्वास सारंग पर भी नजर टिका दी है। सारंग का भोपाल में एक बंगला है, जहां एक शोरूम खोला गया है। आवासीय प्रयोजन की भूमि पर व्यावसायिक उपयोग होने से उन पर तलवार लटकी हुई है। चूंकि यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए सीधी कार्रवाई तो नहीं हो रही है, लेकिन विधिक पैरवी तेज कर उनको घेरने की योजना बनी है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि अन्य नेताओं और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ फाइलें खोली जा रही हैं। कमलनाथ सरकार ने ज्यादातर भाजपा नेताओं की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को हटा दिया है। कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप झेल रहे नरोत्तम मिश्रा पर ईओडब्ल्यू ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।जहां तक सरकार की इस कार्रवाई से एक बात स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है कि वह बीजेपी नेताओं को निशाना बनाकर दवाब में रखना चाहती है। सरकार का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से बीजेपी के अन्य विधायकों को भी संदेश जाएगा कि वह सरकार के खिलाफ आने में 100 बार सोचें। फिलहाल तो सिर्फ सरकार की मंशा इतनी भर है। यदि वाकई में कुछ गलत था तो पिछले 14 माह से सरकार क्या कर रही थी।
इस बीच संकेत मिले हैं कि घपलों और घोटालों में घिरे कुछ जनप्रतिनिधियों को घेरने के लिए गवाहों को सक्रिय किया जा रहा है। कुछ खास अफसरों को इसके लिए विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेक्स स्कैंडल से लेकर विभिन्न घोटालों में कुछ विधायकों को घेरने की भी रणनीति बन गई है। होली बाद इसमें बड़ी कार्रवाई के अनुमान लग रहे हैं। चूंकि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस दो सीटों पर अपनी बढ़त बनाना चाहती है, इसलिए भी वह साम, दाम, दंड और भेद का हर अस्त्र इस्तेमाल करने में जुटी है।
गौरतलब है कि इसके पहले कांग्रेस ने विधायक संजय पाठक पर विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया था। उन पर यह आरोप लगाया गया था कि विधायकों को पैसे का लालच देकर उन्होंने विधायकों को खरीदने की कोशिश की।


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