लेखक 


--ब्रह्म की उस शक्ति से युक्त हूँ


कौन हारा  कौन जीता  ये कथन  अच्छा नहीं है |
बात जब आए हृदय की तो गबन अच्छा नहीं है |

चार दीवारें मगर  मुझको  सभी  बहरी लगीं |
राज सब  उथले लगे थे  दूरियाँ  गहरी  लगीं |
सिर्फ पहरे के लिए छत की नहीं दरकार थी |
प्रेम  पाने के  लिए ही आखिरी  तकरार  थी |

ईंट क्यों जोड़ी  नहीं है प्रेम  का गारा  लगाकर,
इसलिए मैं कह रहा हूँ ये भवन अच्छा नहीं है |

फूल भँवरे पत्तियों से क्या भला गुलजार होगा ?
जब तलक बिंधा गुलाबों में न कोई खार होगा |
जब तलक भँवरे न गूंजे क्या कली का मान है ?
पुष्प कैसा पुष्प है जिसको तनिक अभिमान है ?

वाटिका के वृक्ष धरती से जुड़े दिखते नहीं अब,
इसलिए मैं कह रहा हूँ ये चमन अच्छा नहीं है |

हैं  नहीं  रंगीन   फूलों  की लड़ी इसमें कहीं |
तितलियां न मोतियों से ही जड़ी इसमें कहीं |
क्या जरूरत सादगी की अब मुझे मैं मुक्त हूँ |
आज जाना ब्रह्म की उस शक्ति से मैं युक्त हूँ |

क्यों  बताओ  इंद्रधनुषी  रंग इसमें  से  नदारद |
इसलिए मैं कह रहा हूँ ये कफन अच्छा नहीं है |


अमित हिंदुस्तानी |लखीमपुर खीरी

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परिचय 

अमित हिंदुस्तानी... साहित्य में युवा हस्ताक्षर हैं। किसान परिवार में जन्म लेकर ठेठ देहाती जीवन की पीड़ा से इनका नाता है। लेब टेकनिशियन  की नौकरी करते हुए इन्होंने अपनी आँखों में कुछ लीक से हटकर कर गुजरने का सपना पाला है तो सीने में जज्बे की वह आग भी धधक रही है जो मानवीय व्यथा को सुचारु व्यवस्था से परिचय कराने को बेताब है। मृदुभाषी अमित काव्य की बहुत सी विधाओं में प्रभु प्रदत्त गुण से संपन्न हैं।  एम पी मीडिया पॉइंट के लिए रचनाएँ देते रहने की स्वीकृति से हम उनके आभारी हैं।
संपादक
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