लेखक 

मन के कच्चे कुल्हड़ में 
पनिहाई बातें मत भरना, 
रिस जाएगी।

मन के कच्चे कुल्हड़ में 
पनिहाई बातें मत भरना,
 रिस जाएगी।

रिश्तों की रेशमी रस्सी को,
ओछेपन की सिल पर मत घिसना,  

टुट जाएगी l

मन के कच्चे कुल्हड़ में
पनिहाई बातें मत भरना, 
रिस जाएगी।

अपनी कुंठाओं के घावों पर,
झुंझलाहट के फोहे मत रखना, सूख जाएगी l

लेन-देन की घटा जोड़ 
संबंधों पर लबादा है, 
मत लदना 
अंतरात्मा पिस जाएगी l

मन के कच्चे... 

अवसाद एक फफूँदी है 
जीवन पर मत लगने देना 
सड़ जाएगी l

मन के कच्चे... 

ख़ुशी,  दया,  माफ़ी,  मदद 
बाँटते रहना,, कमी मत करना 
खुशियाँ मिल जाएँगी l

मन के कच्चे... 

कोई कड़वे शब्द बोले तब 
झोली फैलाये खड़े रहना 
चुप्पी जीत जाएगी l

मन के कच्चे कुल्हड़ में 
पनिहाई बातें मत भरना 
रिस जाएँगी l

गौरव शर्मा, गाजियाबाद

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परिचय

गौरव शर्मा गाजियाबाद में रहते हैं। वैसे तो गणित के प्राध्यापक हैं, लेकिन शब्दों को कहानियों और कविताओं में पिरोना इनकी रूचि है | वे कहते है , "मैं अवसाद में कवि हूँ और हर्ष में कहानीकार |"
आपने अंग्रेजी के बहुचर्चित तीन उपन्यास लिखें हैं | साथ ही 'Unbudgeted Innocence" बच्चों के लिए लिखा कहानी-संग्रह है | वे अपनी कहानियों और कविताओं के माध्यम से सामाजिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक सन्देश देने के लिए प्रयासरत रहते हैं | आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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