मंडी कर्मचारी अधिकारी चले आंदोलन की राह पर ।

दिनेश शर्मा , आष्टाएमपी मीडिया पाइंट 

हाल ही में मध्य प्रदेश शासन द्वारा मंडी अधिनियम 1972 में किये संशोधन के खिलाफ मंडी बोर्ड की समस्त मंडियों के साथ सभी आष्टा मंडी के अधिकारी कर्मचारी भी कर रहे है विरोध,  तीन दिवस काली पट्टी बांध कर करेंगे कार्य ।

 शासन  द्वारा हाल ही मंडी अधिनियम 1972 में किये  संशोधन  के नवीन अध्यादेश 2020 को  1 मई मजदूर दिवस पर जिस तरह इसके प्रतिकूल प्रभावओ को जाने बिना  लागू कर दिया गया है ।  जबकि ,  इस संशोधन से  हर मंडी क्षेत्र के किसानों को उनकी उपज का सही दाम, सही तोल व समय पर भुगतान होगा इसकी कोई ग्यारंटी नही दिखाई दे रही है, साथ ही मंडी के व्यापारियों के साथ भी बहुत बड़ा कुठाराघात होता दिखाई दे रहा है ।बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के हाथों का खिलौना बन जाएगी मंडिया ओर किसान ।मन चाहे तरीके से सारा कार्य करेगी कम्पनिया  ।प्रायवेट मण्डिया बन जाने के बाद शासन या मंडी ओर मंडी प्रशासन का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप, ओर नियंत्रण नही रह पाएगा ।
इसके साथसाथ मंडियों में कार्य कर रहे सभी अधिकारी कर्मचारी भी इस संशोधन से बहुत प्रभावित होंगे ।
इसलिए मंडी अधिनियम 1972 के संशोधन अध्यादेश 2020 के पुरजोर विरोधके लिए मध्यप्रदेश  की समस्त 257 मंडियों ओर मंडी बोर्ड के नेतृत्व में एक   संयुक्त मोर्चा का गठन हुआ ।

संयुक्त मोर्चे ने एक्ट में हुए संशोधन के विरोध स्वरूप व पड़ने वाले विपरीत प्रभावों से अवगत कराते हुये शासन से निवेदन किये थे , किन्तु किसी भी प्रकार से कोई सकारात्मक जवाब नही आने पर आज 28 मई से सभी 257 मंडियों के अधिकारी कर्मचारी  संयुक्त मोर्चे के नेतृव में मंडी बोर्ड के आव्हान पर 3 दिवसीय 30 मई तक सांकेतिक विरोध करते हुए काली पट्टी बांध कर कार्यालय ने कार्य करेंगे ।
आज इसी सांकेतिक विरोध में आष्टा कृषि उपज मंडी समिति के समस्त कर्मचारियों ने काली पट्टी बांध कर   कार्यालय के गेट कर एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी एकता के नारे लगाए ।और संशोधित एक्ट अध्यादेश 2020 का पुरजोर तरीके से विरोध किया ।
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           योगेश नागले मंडी सचिव आष्टा
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