लेखिका 


 दूरदर्शिता बनाम स्व विश्लेषण
दोस्तो....! 
बहुत दूरदर्शी नही हो गए हम ... .... ?
पढ़ कर 
दो चार किताबे 
आधी अधूरी 
सुना सुना कर 
बातें
गली,मौहल्ले से जाते 
रोटी पानी खाते 
सियासी विश्लेषण करते 
हकीकत से दो चार फुट उपर 
धर्म की 
कर्म की
भ्रम की
आलोचना,समालोचना करते
हमारा नज़रियां कोई नही
हमारा तो बस 
स्वभाव ही है
कुएँ मे बैठ
समन्दर के खिलाफ 
अवा-तवा बोलना 
कंदराओं मे समाधि लगा
अम्बर को कोसना
एक खूँटे से बंधे हम
घूमते ,रंभाते और 
पूँछ पटक पटक अपना तन 
मिट्टी से सन लेते है
तू तू मैं मै
हमारे फलसफे का 
अगला अध्याय होता है 
अपने गुब्बार को 
विचारधारा का नाम देने का
हम बहुत दूरदर्शी नही हो गए दोस्तो...?
बस जरा निगाह दौडाएं
बस जरा निगाह दौडाएं 

रितु शर्मा, हरिद्वार, उत्तराखंड
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परिचय
रितु शर्मा , हरिद्वार, उत्तराखंड निवासी हैं। पेशे से 
शिक्षिका हैं। और साहित्य सेवा के लिए भी समय निकालती हैं। 
आपके सांझा काव्य संग्रह -" सारांश समय का " , "गूंज" "काव्य मंजरी काव्य संग्रह"  "शब्दों का प्याला"में कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही विभिन्न समाचार पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। आप कई मंचों से सम्मानित भी हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
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