आकाल मृत्यु को प्राप्त परिजन के आत्मा की शांति को लेकर हुई क्षेत्र में पालिया पूजन
राजेश बनासिया, भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
वैसे तो इनदिनों पूरे देशभर में लॉकडाउन चल रहा है जिससे समस्त मन्दिर बन्द हैं व पुजारी ही पूजन करते नजर आ रहे है।
इसी बीच क्षेत्र में बुधवार को कई गावों मे पालिया पूजन हुई जिसमें लॉकडाउन के चलते घर के अलावा बाहरी लोगो को आमंत्रित नही किया गया।
आखिर क्या होती है पालियादेव पूजन में उन मृत परिजनों के आत्माओ की शांति के लिए पूजन की जाती जिनकी अकाल मौत हो जाती है। यह पूजन उनकी भटकती हुई आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए की जाती है। वैशाख की चौदस को उक्त पूजन का विधान है।
बीते बुधवार को यह पूजा इछावर ब्लाक के गांव भाऊँखेड़ी,दिवड़िया,खेरी,नरसिंहखेड़ा,मोहनपुरलैंडी, कांकरखेड़ा,लसूड़ियाराम,मोगराराम,आमाझिर,ब्रिजिशनगर, सहित अन्य गाँवो में पालियदेव पूजन करने का सिलसिला दिन भर चलता रहा इस सम्बंध में अधिक जानकारी देते हुए ग्राम भाड़ाखेड़ी के रोहित वर्मा ने बताया की जब परिवार में किसी की आकाल मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति की आत्मा भटकती फिरती है व साथ ही वह आत्मा परिवारजनों को भी परेशान करती रहती है इसलिये उस मृत व्यक्ति की आत्मा का एक उचित स्थान बनाया जाता है जहाँ उस मृत आत्मा को विधि विधान से बैठाया जाता हैं फिर वह मृत आत्मा किसी भी परिवारजन को परेशान नहीं करती है।
ग्रामीण बताते है की परिवार में जब कोई धार्मिक आयोजन होता है तो आयोजन की शुरुआत के सबसे पहले पालियदेव की निमंत्रण देना पड़ता हैं ऐसा करने से फिर निर्विध्न रूप से परिवार में होने वाला वह आयोजन सफल हो जाता है अगर आयोजन से पहले पालियदेव को आमंत्रित करना भूल जाते है तो वह उनकी आत्मा परिवार के किसी भी सदस्य के शरीर में प्रवेश करके निमंत्रण नहीं दिया इसकी याद दिला देती हैं बीते बुधवार को पूरे क्षेत्र में पालियदेव पूजन का कार्यक्रम चलता रहा जिसमे कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए हर बार कि तरह बड़ी-बड़ी पंगत (भोज के कार्यक्रम) कहीं भी देखने मे नहीं मिले।
राजेश बनासिया, भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
वैसे तो इनदिनों पूरे देशभर में लॉकडाउन चल रहा है जिससे समस्त मन्दिर बन्द हैं व पुजारी ही पूजन करते नजर आ रहे है।
इसी बीच क्षेत्र में बुधवार को कई गावों मे पालिया पूजन हुई जिसमें लॉकडाउन के चलते घर के अलावा बाहरी लोगो को आमंत्रित नही किया गया।
आखिर क्या होती है पालियादेव पूजन में उन मृत परिजनों के आत्माओ की शांति के लिए पूजन की जाती जिनकी अकाल मौत हो जाती है। यह पूजन उनकी भटकती हुई आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए की जाती है। वैशाख की चौदस को उक्त पूजन का विधान है।
बीते बुधवार को यह पूजा इछावर ब्लाक के गांव भाऊँखेड़ी,दिवड़िया,खेरी,नरसिंहखेड़ा,मोहनपुरलैंडी, कांकरखेड़ा,लसूड़ियाराम,मोगराराम,आमाझिर,ब्रिजिशनगर, सहित अन्य गाँवो में पालियदेव पूजन करने का सिलसिला दिन भर चलता रहा इस सम्बंध में अधिक जानकारी देते हुए ग्राम भाड़ाखेड़ी के रोहित वर्मा ने बताया की जब परिवार में किसी की आकाल मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति की आत्मा भटकती फिरती है व साथ ही वह आत्मा परिवारजनों को भी परेशान करती रहती है इसलिये उस मृत व्यक्ति की आत्मा का एक उचित स्थान बनाया जाता है जहाँ उस मृत आत्मा को विधि विधान से बैठाया जाता हैं फिर वह मृत आत्मा किसी भी परिवारजन को परेशान नहीं करती है।
ग्रामीण बताते है की परिवार में जब कोई धार्मिक आयोजन होता है तो आयोजन की शुरुआत के सबसे पहले पालियदेव की निमंत्रण देना पड़ता हैं ऐसा करने से फिर निर्विध्न रूप से परिवार में होने वाला वह आयोजन सफल हो जाता है अगर आयोजन से पहले पालियदेव को आमंत्रित करना भूल जाते है तो वह उनकी आत्मा परिवार के किसी भी सदस्य के शरीर में प्रवेश करके निमंत्रण नहीं दिया इसकी याद दिला देती हैं बीते बुधवार को पूरे क्षेत्र में पालियदेव पूजन का कार्यक्रम चलता रहा जिसमे कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए हर बार कि तरह बड़ी-बड़ी पंगत (भोज के कार्यक्रम) कहीं भी देखने मे नहीं मिले।


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