लेखिका
ज़माने भर के किस्से
वो कितनी शिद्दत से सुनाती है
वही तो ऐसी सखी है
जो हर लम्हा बस मुस्कुराती है
उसकी बातों के लच्छे यूँ उलझते हैं
सुबह से शाम तक बस,वही तो सुलझाती है
ज़रा भी आँसू का क़तरा तैर जाए आँखों में
गया आँखों में तिनका है मुस्कुरा कर ये बताती है
नख से शिख तक जो उसको सुंदरता ने घेरा है
उसकी हर इक अदा एक राग सी गुनगुनाती है
हूँ रोशन पड़ौसी,रिश्तों और मित्रों से
हर इक सम्बन्ध वो बड़े दिल से निभाती है
कौन है वो ज़रा,पूछोगे अगरचे तुम
वो हंसी है, शोख़ है ,चंचल है, चतुर चित्तचोर है पगली !!
अपना नाम बड़ी बेबाक़ी से बस ज़िन्दगी बताती है
ज़माने भर के किस्से
वो कितनी शिद्दत से सुनाती है
वही तो ऐसी सखी है
जो हर लम्हा बस मुस्कुराती है
उसकी बातों के लच्छे यूँ उलझते हैं
सुबह से शाम तक बस,वही तो सुलझाती है
ज़रा भी आँसू का क़तरा तैर जाए आँखों में
गया आँखों में तिनका है मुस्कुरा कर ये बताती है
नख से शिख तक जो उसको सुंदरता ने घेरा है
उसकी हर इक अदा एक राग सी गुनगुनाती है
हूँ रोशन पड़ौसी,रिश्तों और मित्रों से
हर इक सम्बन्ध वो बड़े दिल से निभाती है
कौन है वो ज़रा,पूछोगे अगरचे तुम
वो हंसी है, शोख़ है ,चंचल है, चतुर चित्तचोर है पगली !!
अपना नाम बड़ी बेबाक़ी से बस ज़िन्दगी बताती है


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