लेखिका
सब इन्द्रधनुषी रंग
🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈अब नहीं लड़ी जाती जिंदगी की ये जंग
अपनी हालत देख के रह गए खुद ही दंग
प्रेम वफ़ा समर्पण थे सब इन्द्रधनुषी रंग
आंसू दर्द तड़प आहें रह गए अपने संग
सब सीखा न सीखा जग में जीने का ढ़ंग
मुस्कानें खुशियां बांट के भी हुए हम बेरंग
तन टूटा मन टूटा, टूट रहा है ये अंग अंग
जीवन नैया मे पड़ी दरारे,नहीँ उठती तरंग
खुद की गलती पर भी इल्जाम हमारे सिर
झूठ छलावा धोखा नाचे बिन पिए ही भंग
बोझिल सांसें काँधे लाश लिए फिरे ये मन
चाहे अपने या पराए सबसे मोह हुआ भंग
फर्ज के घुंघरू बांध नृत्य किया सबकी
चाहतों पर खोखले रिश्तों ने बजाए मृदंग
जुड़ाटूटा बिखरा,अब विश्राम चाहे मनतन
लहूलुहान आत्मा भंगुर हो चला अंगप्रत्यंग
प्रेरणा परमार "तृष्णा" मुरैना, मध्यप्रदेश
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परिचय
श्रीमती प्रेरणा परमार, मुरैना मध्य प्रदेश की निवासी हैं। आप उच्च शिक्षित हैं और साहित्य सेवा के साथ साथ सामाजिक सेवा के क्षेत्र में काउंसलर के रूप में भी सक्रिय हैं। साथ ही आप स्टेट ऑफ चीफ डायरेक्टर एंटी करप्शन ऑफ़ इंडिया का दायित्व भी वहन कर रही हैं।
आपकी दों पुस्तकों क़ा प्रकाशन हुआ है जो "लफ्ज लफ्ज -सिर्फ तुम"
"पीड़ा अंतर्मन की" नाम से उपलब्ध हैं। आपका शेष स्मृतियाँ नामक काव्य संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रहा है। कई साझा काव्य संग्रह में आपकी सहभागिता रही है। कई समाचारपत्रो में रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है। साहित्य व समाजसेवा के क्षेत्र में कई बार पुरुस्कृत किया जा चुका है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी कवियत्री का एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक


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