नमःशिवाय
**********हे जगतपिता हे पालनहार
फिर आया सावन सोमवार।
बेलपत्र और जल अर्पण कर
तुझे मनाऊँगी हे भोलेशंकर ।
नंदी बैल है तेरी सवारी
तेरी लीला अपरंपार हे त्रिपुरारी
भष्मरमैया डमरु बजैया शंकर
भय का नाश करो हे अभयंकर।
कामनारहित जीवन हो मेरा
सुख दुख से ऊपर का फेरा
परोपकार का भाव जगाकर
भवसागर से पार करो करुणाकर ।
तुम कहलाते औढ़रदानी
सभी कहते मुझको अज्ञानी
अज्ञानी बन कर खुश रहती
कामना रहित बन विचरती।


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