लेखिका 

उम्र दराज़ 


 उम्रदराज औरतों की
कुछ ख्वाहिशें पूर्ण
होने लगती है बच्चों से
पूर्ण होने के खुशी पर
अपूर्ण मन के अकुलाहट
पीड़ा देता है...
सपने दीये की बुझते लौ
जैसे अथक प्रयास करता है
खुद को स्थायित्व देने को
पर कभी-कभी या अंततः
 बुझ ही जाता है...
थकी औरत के सपने भी
उम्र के साथ थक जाते है
बच्चों के आँखों से सपने
उम्रदराज औरत उनके
बचपन से बुनने लगती है
और बच्चे अपने सपने 
खुद बुनने लगते है...
औरतों को उनके सपने में
अपने सपने जोड़ कर
देखना होगा..
उम्रदराज औरत को
समझना होगा अब तक
जैसे समझती आई है...
उम्रदराज औरत को
अब स्वस्थ रहना होगा
ताकि बीमारी की सूची
लम्बा ना हो उनके लिये
कोई मेडिक्लेम नही है...
पर ना चाहते हुये बीमारी
सुरसा की तरह उन्हें
निगलते रहती है...
बहुत दुखी हो जाती है
उम्रदराज औरतें सोच कर
कोई विकल्प भी तो नही
पर अब उसे अपनी नियति
मानकर खुश रहती है
उम्रदराज हर औरत को अब
खुश रहना चाहिए।

-प्रीति श्रीवास्तव, कोलकाता, पश्चिम बंगाल-------------------

परिचय

प्रीति श्रीवास्तव , कोलकाता, पश्चिम बंगाल की निवासी हैं। साहित्य से लगाव होने के साथ ही लेखन आपकी रुचि बन गया। निरंतर लेखन के साथ साथ आपको पेंटिंग में भी खासी रुचि है। आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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