कोरोना_मौत का बहाना और रसूकदारों का खिलौना !
अब जो भी मर रहे हैं सिर्फ़ कोरोना से,
कोरोना ने पछाड़ा सभी बिमारियों को..
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कोरोना रोग नहीं अब उद्योग हो गया जो गरीबों के सहारे चल रहा है। दूसरी तरफ दर्दनाक कांड यह है कि अंत्री,मंत्री,अभिनेता एवं उनका परिवार खुद को कोरोना संक्रमित बताकर खुद को गौरांवित महसूस कर रहा है। खासबात यह कि उनमें से एक भी मरा नहीं, मरे सिर्फ़ गरीब।
मुझे लिखने मे संकोच नहीं कि कोरोना संक्रमित शहंशाह हैं उसमे अभिनेता अमिताभ बच्चन,केंद्रीय मंत्री अमित शाह,मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जैसी अनेक हस्तियाँ शामिल हैं।
खासबात यह है कि यह तमाम हस्तियाँ अपनी बिमारियों को सदैव छिपाती आई हैं। अस्पताल मे भर्ती होने के बाद भी पता नहीं चलने देती कि आखिर हम किस रोग से ग्रसित हैं, लेकिन कोरोना के इस दौर मे खुद बता रहे हैं कि मैं संक्रमित हूँ।
विश्वास खो चुका मीडिया उनके पीछे लग जाता है क्योंकि विज्ञापन भी तो कोई गरीब देता नहीं।
हकीकत यह है कि यह तमाम हस्तियाँ दिन मे आंखें मूंदकर सिर्फ रात हो जाने का भ्रम पाले हुए हैं जबकि पब्लिक सब समझ रही है।
जो वास्तव मे कोरोना के कारण अनंत यात्रा पर निकल गए उनके परिवारों को आखिर सरकार ने क्या आर्थिक मदद की!! उन गमगीन परिवारों के हालात क्या हैं ? क्या सरकार उनसे वाकिफ है ?
छोटे तबकों के लोगों को पकड़-पकड़कर अस्पतालों मे भरने की मंशा उजागर हो गई है। हर बिस्तर पैसे उगल रहा है। उन मरीजों से सुना है मेने जो "कोरोना विजेता" का खिताब लेकर वापस घरों मे लोटे हैं। उनका कहना है कि "कुच्चदियाओं" ने एक गोली भी नहीं खिलाई, पकड़ कर ले गया, वापस छोड़ गया।
ऐसा तो तब हुआ था जब सन् 1975 मे आपातकाल लगाया इंदिरा गांधी ने, अविवाहितों की नसबंदी करा दी गई थी__वैसा का वैसा ही माहौल अब देखने को मिल रहा है।
क्या इन डाक्टरों को भी कोई टारगेट दे रखा है सरकार ने? आम नागरिकों का कहना है कि कोरोना_ मौत का बहाना और रसूकदारों का खिलौना तो नहीं....!!
क्योंकि अब जितनी भी मौतें हो रही हैं वह सब कोरोना के कारण!! क्या बाकी सभी बिमारियों को कोरोना वायरस चाट गया?
अब जो भी मर रहे हैं सिर्फ़ कोरोना से,
कोरोना ने पछाड़ा सभी बिमारियों को..
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राजेश शर्मा
आज फिर इछावर नगर मे चार व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाये गए हैं। बढ़ी बात यह है कि नगर के तीन अलग-अलग इलाकों के रहवासी यानि कि कोरोना ने इछावर के हर कोना को छूना स्टार्ट कर दिया है। तीन यंग ऐज़ के हैं और एक बुज़ुर्ग। इछावर नगर को जो कोराना पूरे लाकडाउन के समय छू नहीं पाया था वह अब घर-घर मे दस्तक दे रहा है। सबसे बढ़ी बात यह है कि यह महामारी बिमारी अब अपने नाम से घरों को सताने लगी है । लोग चमकने लगे हैं। कोरेंटाइन के दृश्य ऐसे उपस्थित हो रहे हैं जैसे किसी मौत को मुकाम पर पहुंचने से रोका जा रहा है। भयभीत लोग सिर्फ बगलें झांकने के लिए बाध्य हो गए हैं। राजनेताओं ने कोरोना को खिलौना बनाया_पूंजीपतियों ने दिखावा, अस्पतालों ने उद्योग लेकिन फजिहत सिर्फ मध्यम और निम्नवर्ग की हो रही है जिन्हें पकड़-पकड़कर ऐसे लेजाया जा रहा है जैसे वह धारा 302 या 376 के अपराधी हैं। चंद दिनों मे रिहा भी कर दिया जाता है "कोरोना विजेता" का खिताब सौंपकर।कोरोना रोग नहीं अब उद्योग हो गया जो गरीबों के सहारे चल रहा है। दूसरी तरफ दर्दनाक कांड यह है कि अंत्री,मंत्री,अभिनेता एवं उनका परिवार खुद को कोरोना संक्रमित बताकर खुद को गौरांवित महसूस कर रहा है। खासबात यह कि उनमें से एक भी मरा नहीं, मरे सिर्फ़ गरीब।
मुझे लिखने मे संकोच नहीं कि कोरोना संक्रमित शहंशाह हैं उसमे अभिनेता अमिताभ बच्चन,केंद्रीय मंत्री अमित शाह,मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जैसी अनेक हस्तियाँ शामिल हैं।
खासबात यह है कि यह तमाम हस्तियाँ अपनी बिमारियों को सदैव छिपाती आई हैं। अस्पताल मे भर्ती होने के बाद भी पता नहीं चलने देती कि आखिर हम किस रोग से ग्रसित हैं, लेकिन कोरोना के इस दौर मे खुद बता रहे हैं कि मैं संक्रमित हूँ।
विश्वास खो चुका मीडिया उनके पीछे लग जाता है क्योंकि विज्ञापन भी तो कोई गरीब देता नहीं।
हकीकत यह है कि यह तमाम हस्तियाँ दिन मे आंखें मूंदकर सिर्फ रात हो जाने का भ्रम पाले हुए हैं जबकि पब्लिक सब समझ रही है।
जो वास्तव मे कोरोना के कारण अनंत यात्रा पर निकल गए उनके परिवारों को आखिर सरकार ने क्या आर्थिक मदद की!! उन गमगीन परिवारों के हालात क्या हैं ? क्या सरकार उनसे वाकिफ है ?
छोटे तबकों के लोगों को पकड़-पकड़कर अस्पतालों मे भरने की मंशा उजागर हो गई है। हर बिस्तर पैसे उगल रहा है। उन मरीजों से सुना है मेने जो "कोरोना विजेता" का खिताब लेकर वापस घरों मे लोटे हैं। उनका कहना है कि "कुच्चदियाओं" ने एक गोली भी नहीं खिलाई, पकड़ कर ले गया, वापस छोड़ गया।
ऐसा तो तब हुआ था जब सन् 1975 मे आपातकाल लगाया इंदिरा गांधी ने, अविवाहितों की नसबंदी करा दी गई थी__वैसा का वैसा ही माहौल अब देखने को मिल रहा है।
क्या इन डाक्टरों को भी कोई टारगेट दे रखा है सरकार ने? आम नागरिकों का कहना है कि कोरोना_ मौत का बहाना और रसूकदारों का खिलौना तो नहीं....!!
क्योंकि अब जितनी भी मौतें हो रही हैं वह सब कोरोना के कारण!! क्या बाकी सभी बिमारियों को कोरोना वायरस चाट गया?


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