गरजत -बरसत सावन

  (गीत)

                          लेखिका 
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पानी मे मत भीज गुजरिया देखे तुझको सकल नगरिया 

  बारिश की बूँदें मुँह चूमें
    छतरी भी सँग नाचे झूमें
      लोकलाज से अखियाँ मूंदे
        सिमटी सिकुड़ी भई चुनरिया

पानी में मत भीज गुजरिया देखे तुझको सकल नगरिया

  कमसिन तन में हुलसे हुमके
    टप टप पड़ती शीतल बूँदे
      मदहोशी मे नव्य नवेंली
         पाँव थिरकते लचक कमरिया

पानी में  मत भीज गुजरिया  देखे तुझको सकल नगरिया 
  
  यौवन से गदरायी बदली
    हर-हर कहकर घर से निकली 
      द्वारे-द्वारे प्यास बुझायें
          सागर से भर लाई गगरिया

पानी में  मत भीज गुजरिया देखे तुझको सकल नगरिया

  पीहर से संदेशा आये
    बाबुल की गलियाँ याद पिराये
      प्रिय बिन रतिया सूनी लागे
         मन मे हूक उठे लहरिया

पानी में मत भीज गुजरिया देखे तुझको गरजत -बरसत सावन
  गीत
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पानी मे मत भीज गुजरिया देखे तुझको सकल नगरिया 

  बारिश की बूँदें मुँह चूमें
    छतरी भी सँग नाचे झूमें
      लोकलाज से अखियाँ मूंदे
        सिमटी सिकुड़ी भई चुनरिया

पानी में मत भीज गुजरिया देखे तुझको सकल नगरिया

  कमसिन तन में हुलसे हुमके
    टप टप पड़ती शीतल बूँदे
      मदहोशी मे नव्य नवेंली
         पाँव थिरकते लचक कमरिया

पानी में  मत भीज गुजरिया  देखे तुझको सकल नगरिया 
  
  यौवन से गदरायी बदली
    हर-हर कहकर घर से निकली 
      द्वारे-द्वारे प्यास बुझायें
          सागर से भर लाई गगरिया

पानी में  मत भीज गुजरिया देखे तुझको सकल नगरिया

  पीहर से संदेशा आये
    बाबुल की गलियाँ याद पिराये
      प्रिय बिन रतिया सूनी लागे
         मन मे हूक उठे लहरिया

पानी में मत भीज गुजरिया देखे तुझको सकल नगरिया !!!

               त्रिलोचना कौर

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